शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)
Shiva Samhita with Hindi Commentary
भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा
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षुमणाको आवृत्त करती हुई अर्थात् उससे मिलीहुई
नासिकाके दक्षिणद्वारको गई है ॥ २५ ॥
मूलम्-पिङ्गला नाम या नाडी दक्षमार्गे
व्यवस्थिता ॥ सुषुम्णा सा समाश्लिष्य
वामनासापुटे गता ॥२६ ॥
टीका-दक्षिणमार्गमें जो पिङ्गला नाडी है वह सुषु-
म्णाके आसरे होके नासिकाके वामद्वारको गई है॥२६॥
मूलम्-इडापिंगलयोर्मध्ये सुषुम्णा या भ-
वेत्खलु ॥ षट्स्थानेषु च षट्शक्तिं षट्-
पद्मं योगिनो विदुः ॥ २७ ॥
टीका-इडा पिङ्गलाके मध्यमें सुषुम्णा है इस सुषु-
म्णाके छः स्थानमें छः शक्ति हैं इनके नाम यह हैं डा-
किनी, हाकिनी, काकिनी, लाकिनी; राकिनी, शाकिनी,
और इन्हीं छः स्थानोंमें छः पद्म हैं उनके नाम यह हैं
आधार, स्वाधिष्ठान, मणिपूर, अनाहत, विशुद्ध, आज्ञा
यह अपने ज्ञानसे योगी लोग जानते हैं ॥ २७ ॥
मूलम्-पंचस्थानं सुषुम्णाया नामानि
स्युर्बहूनि च ॥ प्रयोजनवशात्तानि ज्ञात-
ानीह शास्त्रतः ॥ २८ ॥