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सर्वकोश
शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

Shiva Samhita with Hindi Commentary

भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished216 पृष्ठ

पृष्ठ 46, कुल 216 में से

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पृष्ठ 46

( ४२ ) शिवसंहिता भाषाटीकासमेता ।
टीका-वह चित्रानाडी पंचवर्ण अतिउज्ज्वल शुद्ध
है और देहके उपाधिका कारणभी वही सुषुम्णान्त-
र्गता अर्थात् चित्रा नाडी है. तात्पर्य यह है कि, आत्म-
स्वरूप वही है ॥ १९ ॥
मूलम्-दिव्यमार्गमिनं प्रोक्तममृतानन्द-
कारकम् ॥ ध्यानमात्रेण योगींद्रो दुरि-
तौघं विनाशयेत् ॥ २० ॥
टीका-यह मार्ग बहुत श्रेष्ठ अमृतानन्दकारक मु-
क्तिका दाता हमने कहा है जिसके ध्यानमात्रसे योगी
लोगोंके पापका समूह नाश होजाताहै ॥ २० ॥
मूलम्--गुदात्तु द्व्यंगुलादूर्ध्वं मेढ्रात्तु द्व्यंगुला-
दधः ॥ चतुरंगुलविस्तारमाधारं वर्तते
समम् ॥ २१ ॥
टीका-गुदासे दो अंगुल ऊपर और मेढ्रसे दो अं-
गुल नीचे मध्यमें चार अंगुल विस्तार आधारपद्म
है॥ २१॥
मूलम्-तस्मिन्नाधारपद्मे च कर्णिकायां सु-
शोभना ॥ त्रिकोणा वर्त्तते योनिः सर्वतं-
त्रेषु गोपिता ॥ २२ ॥
टीका-उस आधारपद्मके कर्णिकामें अर्थात् डंडीमें