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सर्वकोश
शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

Shiva Samhita with Hindi Commentary

भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished216 पृष्ठ

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पृष्ठ 26

( २२ ) शिवसंहिता भाषाटीकासमेता ।
दुःखका आदि अंत शून्य है इस हेतुसे निश्चय आत्मा
सुखस्वरूप है ॥ ६१ ॥
मूलम्-यस्मान्नाशितमज्ञानं ज्ञानेन विश्व-
कारणम् ॥ तस्मादात्मा भवेज्ज्ञानं ज्ञानं
तस्मात्सनातनम् ॥ ६२ ॥
टीका-जिसकरके अज्ञान नाश होताहै और यह
जान पडताहै कि अज्ञानही संसारका कारण है सोई
आत्मज्ञान है और ज्ञानही नित्य है ॥ ६२ ॥
मूलम्-कालतो विविधं विश्वं यदा चैव भवे-
दिदम् ॥ तदेकोऽस्ति स एवात्मा कल्प-
नापथवर्जितः ॥ ६३ ॥
टीका-काल पायके अनेक प्रकारका संसार उत्पन्न
होताहै, सो वह एक आत्मा है वह कल्पनापथवर्जित
है अर्थात् कल्पना नहीं होसक्ती ॥ ६३ ॥
मूलम्-बाह्यानि सर्वभूतानि विनाशं यान्ति
कालतः ॥ यतो वाचो निवर्त्तन्ते आत्मा
द्वैतविवर्जितः ॥ ६४ ॥
टीका-आत्मासे जो अतिरिक्त वस्तु उत्पन्न है वह
काल पायके नाश होजाती हैं आत्मा द्वैतरहित ॰ है,