शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)
Shiva Samhita with Hindi Commentary
भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंप्रथमपटलः । (२१)
उसमें कालका नियम है इस हेतुसे आत्मा सर्वथा निश्चय
परिपूर्ण है ॥ ५८ ॥
मूलम्-यस्मान्न विद्यते नाशः पंचभूतैर्वृथा-
त्मकैः॥ तस्मादात्मा भवेन्नित्यस्तन्नाशो
न भवेत्खलु ॥ ५९॥
टीका-यह जो मिथ्या पंचभूत हैं इनसे उसका नाश
नहीं है इस कारणसे आत्मा नित्य है और यह निश्चय
है कि उसका कभी नाश नहीं होता ॥ ५९ ॥
मूलम्-यस्मात्तदन्यो नास्तीह तस्मादेकोऽ-
स्ति सर्वदा॥यस्मात्तदन्यो मिथ्या स्या-
दात्मा सत्यो भवेत्खलु ॥६० ॥
टीका-जब दूसरा कुछ नहीं है तो एक वही सर्वदा
अद्वैत है जब उसके सिवाय अर्थात् उससे अन्य सब
मिथ्या है तो वही एक शुद्ध आत्मा सत्य है ॥ ६० ॥
मूलम्-अविद्याभूते संसारे दुःखनाशे सुखं
यतः ॥ ज्ञानादाद्यंतशून्यं स्यात्तस्मा-
दात्मा भवेत्सुखम् ॥ ६१ ॥
टीका-यह संसार अविद्यासे उत्पन्न भया है इस-
में दुःखका नाश होनेपर सुख होता है और ज्ञानसे