सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

Shiva Samhita with Hindi Commentary

भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished216 पृष्ठ

पृष्ठ 202, कुल 216 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 202

( १९८ ) शिवसंहिता भाषाटीकासमेता ।
कुण्ड बनायके कनेरपुष्पके साथ गुड और दूध और
घृत मिलायके होम करे ॥ २४४ ॥
मूलम्-अनुष्ठाने कृते धीमान्पूर्वसेवा कृता
भवेत् ॥ ततो ददाति कामान्वै देवी त्रिपु-
रभैरवी ॥ २४५ ॥
टीका-बुद्धिमान् साधक इसीप्रकार अनुष्ठानपूर्वक
आराधना करके त्रिपुरभैरवी देवीको सन्तुष्ट करे तो
उसको इच्छापूर्वक देवी फल देती है ॥ २४५ ॥
मूलम्-गुरुं सन्तोष्य विधिवल्लब्ध्वा म-
न्त्रवरोत्तमम् ॥ अनेन विधिना युक्तो म-
न्दभाग्योऽपि सिद्ध्यति ॥ २४६ ॥
टीका-साधक विधिपूर्वक गुरुको संतोप करके
यह उत्तम मन्त्र ग्रहण करे इस विधानसंयुक्त ग्रहण कर-
नेसे मन्दभाग्य साधकभी सिद्धि लाभ करते हैं ॥२४६॥
मूलम्-लक्षमेकं जपेद्यस्तु साधको विजिते-
न्द्रियः ॥ २४७ ॥ दर्शनात्तस्य क्षुभ्यन्ते
योषितो मदनातुराः ॥ पतन्ति साधक-
स्याग्रे निर्लज्जा भयवर्जिताः॥ २४८ ॥
टीका-योगी इन्द्रियनिग्रहपूर्वक एक लक्ष जप
करे तो उसके दर्शनमात्रसे कामातुर स्त्रियें मोहित