शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)
Shiva Samhita with Hindi Commentary
भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा
पृष्ठ 203, कुल 216 में से
संदर्भ में पढ़ेंपंचमपटलः । ( ३९९ )
होयके साधकके आगे निर्लज्ज और भयरहित होके
गिरती हैं ॥ २४७ ॥ २४८ ॥
मूलम्-जप्तेन च द्विलक्षेण ये यस्मिन्विषये
स्थिताः॥आगच्छन्ति यथातीर्थं विमुक्त-
कुलविग्रहाः ॥ ददति तस्य सर्वस्वं तस्यै-
व च वशे स्थिताः ॥ २४९ ॥
टीका-यह मन्त्र दो लक्ष जप करनेसे कामिनी
स्त्रियें साधकके समीप इसप्रकार आतीहैं कि, जैसे
कुलीना तीर्थोंमें भय लज्जा रहित होके जाती हैं और
साधकके वशमें होके अपना सर्वस्व उसको
देती हैं ॥ २४९ ॥
मूलम्-त्रिभिर्लक्षैस्तथाजप्तैर्मण्डलीका स-
मण्डलाः ॥ २५० ॥ वशमायान्ति ते सर्वे
नात्र कार्या विचारणा॥ षड्भिर्लक्षैर्महीपालं
सभृत्यबलवाहनम् ॥ २५१ ॥
टीका-तीन लक्ष जप करनेसे मंडलसहित मंडल-
पती राजा साधकके वशमें होजाँयगे इसमें संशय नहीं है
और छः लक्ष जप करनेसे बल वाहन संयुक्त राजा
साधकके वश होजायगा ॥ २५० ॥ २५१ ॥
मूलम्-लक्षैर्द्वादशभिर्जप्तैर्यक्षरक्षोरगेश्व-