शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)
Shiva Samhita with Hindi Commentary
भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपंचमपटलः। ( १९७)
जकी स्थिति है और आज्ञाकमलमें कोटिचन्द्रके समान
प्रभायुक्त शक्तिबीजकी स्थिति है यह बीजत्रय परम
गोपनीय भोग और मुक्तिके दाता हैं यह तीनों मन्त्रका
साधक योगी अवश्यसाधन करे॥२३९॥२४०॥२४१॥
मूलम्-एतन्मन्त्रं गुरोर्लब्ध्वा न द्रुतं न वि-
लम्बितम्॥ अक्षराक्षरसन्धानं निःसन्दि-
ग्धमना जपेत् ॥ २४२ ॥
टीका-साधक गुरुसे यह मन्त्रका उपदेश लेके धी-
रे धीरे अक्षर अक्षर स्पष्ट उच्चारणपूर्वक स्थिर मन हो-
के जप करे ॥ २४२ ॥
मूलम्-तद्गतश्चैकचित्तश्च शास्त्रोक्तविधिना
सुधीः॥ देव्यास्तु पुरतो लक्षं हुत्वा लक्ष-
त्रयं जपेत् ॥ २४३ ॥
टीका-बुद्धिमान् साधक एकाग्रचित्तसे शास्त्रवि-
धिअनुसार देवीके समीपमें एक लक्ष होम करके ती-
नलक्ष जप करे ॥ २४३ ॥
मूलम्--करवीरप्रसूनन्तु गुडक्षीराज्यसंयु-
तम् ॥ कुण्डे योन्याकृते धीमाञ्जपान्ते
जुहुयात्सुधीः ॥ २४४ ॥
टीका-बुद्धिमान् साधक जपके पीछे योन्याकार-