शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)
Shiva Samhita with Hindi Commentary
भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपंचमपटलः । ( १६३ )
उस ध्यानको छोडके योगीकी चित्तवृत्ति संसारमें आ-
वेगी तब उस सहस्रवर्षके योगी एकक्षण व्यतीत
भया मानेगा ॥ १२७ ॥ १२८ ॥
अथ आज्ञाचक्रविवरणम् ।
मूलम्--आज्ञापद्मं भ्रुवोर्मध्ये हक्षोपेतं द्विप-
त्रकम्॥शुक्लाभं तन्महाकालः सिद्धो दे-
व्यत्र हाकिनी ॥ १२९ ॥
टीका-भ्रूके मध्यमें जो आज्ञापद्म है उसमें हं-क्षं-
दो बीज हैं और सुंदर श्वेतवर्ण दो पत्र हैं और उस स्था-
नमें महाकाल सिद्ध है और हाकिनीदेवी अधिष्ठात्री
और परमात्मा देवता है ॥ १२९ ॥
मूलम्-शरच्चंद्रनिभं तत्राक्षरबीजं विजृंभितं॥
पुमान् परमहंसोऽयं यज्ज्ञात्वा नावसी-
दति ॥ १३०॥ तत्र देवः परन्तेजः सर्वत-
न्त्रेषु मन्त्रिणः ॥ चिन्तयित्वा परां सिद्धिं
लभते नात्र संशयः ॥ १३१ ॥
टीका-उस आज्ञापद्मके मध्यमें शरच्चंद्रके समा-
न परमतेज चंद्रबीज अर्थात् . ठं बीज विराजमान है
इसके ज्ञान होनेसे परमहंस पुरुषको कभी कष्ट नहीं
होता यह परमतेजका प्रकाश सर्वतंत्रों करके गो-