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सर्वकोश
शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

Shiva Samhita with Hindi Commentary

भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished216 पृष्ठ

पृष्ठ 162, कुल 216 में से

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पृष्ठ 162

( १५८ ) शिवसंहिता भाषाटीकासमेता ।
न करतेहैं सो सर्वसिद्धिदात्री जो पातालसिद्धि है
उसको लाभ करते हैं और उनका दुःख रोगविनाश
होके सकल मनोरथ सिद्ध होते हैं और कालको नि-
रादर कर देतेहैं और परदेहमें प्रवेश करनेकी शक्ति
उत्पन्न होती है ॥ १११ ॥ ११२ ॥
मूलम्-जाम्बूनदादिकरणं सिद्धानां दर्शनं
भवेत् ॥ ओषधीदर्शनञ्चापि निधीनां द-
र्शनं भवेत् ॥ ११३ ॥
टीका-यह साधकको सुवर्णआदि रचना करनेकी
शक्ति होतीहै और देवतोंका दर्शन और निधि और
ओषधीका दर्शन होताहै ॥ ११३ ॥
मूलम्-हृदयेऽनाहतंनाम चतुर्थं पङ्कजं भ-
वेत् ॥११४॥ कादिठान्तार्णसंस्थानं द्वाद-
शारसमन्वितम् ॥ अतिशोणं वायुबीजं
प्रसादस्थानमीरितम् ॥ ११५ ॥
टीका-हृदयस्थानमें जो अनाहतनामक चतुर्थ
पद्म है वह-क-से-ठ-तक अर्थात् क-ख-ग-घ-ङ-च-छ-
ज-झ-ञ-ट-ठ-यह बारह वर्ण और बारहदलसे युक्त है
और अति उज्ज्वल रक्तवर्णसे शोभायमान है और