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सर्वकोश
शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

Shiva Samhita with Hindi Commentary

भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished216 पृष्ठ

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पृष्ठ 123

चतुर्थपटलः । ( ११९ )
टीका-वज्रोलीके भेदसे सहजोली और अमरोली
मुद्राकी संज्ञा है योगीको उचित है कि सबप्रकारसे
बिन्दुको धारण करे ॥ ९५ ॥
मूलम्-दैवाच्चलति चेदङ्गे मेलनं चन्द्रसूर्य-
योः॥ अमरोलिरियं प्रोक्ता लिंगनालेन
शोषयेत् ॥ ९६ ॥
टीका-यदि हठात् वेगवश बिन्दु चले और रजविन्दु-
का सम्बन्ध होजाय तो इसको अमरोली कहते हैं परंतु
लिङ्गनालद्वारा रजविन्दु दोनोंको शोषण करे ॥ ९६ ॥
मूलम्-गतं बिन्दुं स्वकं योगी बन्धयेद्योनिमु-
द्रया ॥ सहजोलिरियं प्रोक्ता सर्वतन्त्रेषु
गोपिता ॥ ९७ ॥
टीका-निजविन्दु चलायमान होय तो योगी योनि-
मुद्राके बन्धसे अवरोध करे इसको सहजोली कहते हैं
यह सर्वतन्त्रों करके गोपनीय है ॥ ९७ ॥
मूलम्-संज्ञाभेदाद्भवेद्भेदः कार्यं तुल्यग-
तिर्यदि ॥ तस्मात्सर्वप्रयत्नेन साध्यते
योगिभिः सदा ॥ ९८ ॥ .
टीका-यदि कार्य एक समान है परन्तु संज्ञासे
अमरोली और सहजोली दो भेद भया है इस हेतुसे