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सर्वकोश
शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

Shiva Samhita with Hindi Commentary

भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished216 पृष्ठ

पृष्ठ 124, कुल 216 में से

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पृष्ठ 124

( १२० ) शिवसंहिता भाषाटीकासमेता ।
योगीको उचित है कि, यह दोनों अमरोली और सहजो-
लीका यत्नपूर्वक सर्वदा साधन करे ॥ ९८ ॥
मूलम्-अयं योगो मया प्रोक्तो भक्तानां
स्नेहतः प्रिये ॥ गोपनीयः प्रयत्नेन न
देयो यस्य कस्यचित् ॥ ९९ ॥
टीका-हेप्रिये पार्वती ! हम भक्तोंपर प्रेम करके यह
योग जो कहा है यत्नपूर्वक गोपनीय है सामान्य मनुष्य-
को कदापि देना उचित नहीं है ॥ ९९ ॥
मूलम्--एतद्गुह्यतमं गुह्यं न भूतं न भविष्य
ति ॥ तस्मादेतत्प्रयत्नेन गोपनीयं सदा
बुधैः ॥ १०० ॥
टीका-इस वज्रोलीमुद्रासे अधिक गोपनीय न कुछ
भया है न होगा. इसकारणसे बुद्धिमान साधकको
यत्नपूर्वक इसको गोप्य रखना उचित है ॥ १०० ॥
मूलम्-स्वमूत्रोत्सर्गकाले यो बलादाकृ-
ष्य वायुना ॥ स्तोकं स्तोकं त्यजेन्मूत्रमू-
र्ध्वमाकृष्य तत्पुनः ॥१०१॥ गुरूपदिष्टमा-
र्गेण प्रत्यहं यः समाचरेत् ॥ बिन्दुसिद्धि-
र्भवेत्तस्य महासिद्धिप्रदायिका ॥ १०२ ॥