शिल्परत्नम् (श्रीकुमार - प्राचीन भारतीय चित्रकला, धातुकर्म, यन्त्र एवं स्थापत्य सटीक)

शिल्परत्नम् (श्रीकुमार - प्राचीन भारतीय चित्रकला, धातुकर्म, यन्त्र एवं स्थापत्य सटीक)
Shilparatnam of Shrikumara with Commentary
श्रीकुमार (सम्पादक: टी. गणपति शास्त्री) द्वारा
DevanagariSanskritpublished280 पृष्ठ
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-ण्य-प-दि-शं कु-र्या-द-थ द्वा-द-शा-
1: इ (–, ty makes it guru)
2: त्यष्टा (–)
3: ष्ट (–)
4: प (ᴗ)
5: दै (–? wait, ᴗ required? No, 4=ᴗ, 5=ᴗ, 6=– -> प-दै? no, दै is guru)
Wait, what meter is verse 39?
Line 17: एष्वष्टादशकोष्ठवत्स्वरपदेष्वन्तःस्थषट्काङ्घ्रिगा-
Line 18: न्यन्तर्वृत्तगतैककोच्छुरितपार्श्वेन्दून्तुन्दीनि च ।
Line 19: इत्यष्टाष्टपदैररण्यपदिशं कुर्यादथ द्वादशा-
Line 20: थैतावन्ति हरित्पदानि परिशिष्टान्यन्तरालान्यपि ॥ ३९ ॥
Line 20: थैतावन्ति हरित्पदानि परिशिष्टान्यन्तरालान्यपि ॥ ३९ ॥
Wait! द्वादशा- / थैतावन्ति -> द्वादशाथैतावन्ति!
द्वादश, अथ एतावन्ति!
Let's scan Line 20:
`थै-ता