शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary
लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)
पृष्ठ 464, कुल 511 में से
संदर्भ में पढ़ें४६४ ] [ श्रीशारदा तिलक
तारं लिखेद्वह्निपुरस्य युग्मे तत्पार्श्वयोर्लर्णमथाग्निबीजम् ।
कोणेषु पूर्वापरयोश्च मन्त्रं पाशांकुशावीतमिदं ज्वरघ्नम् ॥७०
यन्त्रमभ्यर्च्य मन्त्रेण तारपाशाङ्कुशांत्मना !
निवधनीयाज्ज्वरातं स्य हस्तादौ ज्वरशान्तये ॥७१
अब वाणी के स्तम्भन करने वाला यन्त्र लिखा जाता है-लान्त में
अर्थात् क्षकारमें नाम लिखकर पुनः नाम लिखे । कणिकामें ही लाष्टक
लिखना चाहिए । फिर उसी को आठों दिशाओं में लिखना चाहिये ।
यह शत्रुओ की वाणी का स्तम्भन किया करता है ।६५। दूसरा भी
वाणी का स्तम्भन करने वाला है-साध्य का नाम आठ दलों वाली
किणका में लिखे । विदिक पत्रों में भूपुर के कोणों में 'हुम्' लिखना
चाहिये । हरिद्रा की गणपति की मूर्त्ति बनाकर उन के उद्धर में मन्त्र
की स्थापना करे । कतिपय विद्वानों का मत है कि हरिद्रा गणपति यन्त्र
से सवेष्टित करे ।६६। एकान्त स्थान में इसको निक्षिप्त करके प्रतिदिन
पूजन करे तो सेनादि शत्रुओं की वाणी का स्तम्भन किया करता है
।६६।६७। अब ज्वर का हनन करने वाला यन्त्र बतलाया जाता है ।
ऋजु रेखा लिखकर ऋजु ओर तिर्यक षटक लिखना चाहिये । विशति
कोष्ठों में बाहिर सनिवधि बिन्दु से युक्त लकार लिखे । द्वादश कोणोंमें
काष्ठत्रय को एकत्रित करके वहाँ पर नाम लिखना चाहिए । इस
प्रकार से नाम से ग्रथित यह मन्त्र ज्वर का हनन किया करता है ।
।६८। इस मन्त्र को पूजित करके फिर भूत बलि देवे और साध्य के
मस्तक में बाँध देवे तो समस्त ज्वर का नाशक होता है ।६६। अब एक
अन्य ज्वर नाशक मन्त्र बताया जाता है-वह्निपुर के मध्य में तार
अर्थात् प्रणव लिखे । उनके दोनों ओर लवर्ण से युक्त अग्नि बीज को
लिखना चाहिए । दिशाओं के वह्निर्यगों में प्रत्येक में अंकुशत्र को
लिखे तो यह मन्त्र ज्वरघ्न होता है ।७०। इस मन्त्र को तार पाशांकुश
स्वरूप मन्त्र के द्वारा अभ्यर्चित करके ज्वर से आतं व्यक्ति के हाथ
आदि में बाँध देवे तो ज्वर की शान्ति हो जाया करती है ।७१।