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शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary

लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished511 पृष्ठ

पृष्ठ 463, कुल 511 में से

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पृष्ठ 463

एकोनविंश पटल ] ! ४६३
लिखो। कादि वर्णों से युक्त केसर में अर्थात् बत्तीस दलों वाले पंकज में
पहिले की तरह नाम लिखना चाहिये। इसका मृत्युञ्जय देवता है।
।६०।६१। अब स्तम्भन करने वाला मन्त्र बताते हैं--दो प्रणवों
(ओंकारों) से साध्य के नाम से युक्त ‘ग्लौ’--यह लिखे। फिर बाहर
में अष्ट वज्र से युक्त तार लिखना चाहिये ।--क्षं इसको कोणों में
और दिशाओं में ल--लिखकर तीन अक्षरों वाले पाशांकुश लिखे। यह
जृम्भादि विद्या अष्टक स्तम्भन मन्त्र हैं ।६२। पूर्व में भुक् में वह्नि वधू
और पीछे जृम्भी में दो ठकार लिखे। अन्ध मे हुत भक की जाया और
इसके पश्चात् अन्धी मे दो ठकार लिखे। रुन्ध में अग्नि की पत्नी और
रुन्धी में दो ठकार से संयुत लिखना चाहिये ।६३।६४।
लान्ते नाम विलिख्य दिक्षु विलिखेदूभ्यस्तमेवाष्टसु
क्षोणीबिम्बमथोरगेन्द्रभुजगावन्त्योन्यबद्धौ लिखेत् ।
आख्यां तन्मुच्चयोषिभोतफलके यन्त्रं समापादितम् ।
निर्माल्ये निहितं सदा वितनुते वाचां द्विषां स्तम्भन् ।६५
साध्याख्यां कवचं लखेत् बहिरथोटिकपत्रमध्येपु नन् ।
ग्लौमन्येषु महीपुरस्य विलिखेत्कोणेषु गं लान्वितम् ।
वज्रैष्वष्टसु वर्म तोयपुरगं भूपिन्त्वमध्ये स्थितं ।
यन्त्रं रात्रिविनायकान्तमगतं न्यस्येच्छरावद्वये ।६६
रहस्यस्थाननिःक्षिप्त पूजित प्रतिवासरम् ।
स्तम्भनं कुरुते वाचां सेनादीनां च वैरिणाम् ६७
कृत्वा रेखाष्टकमृजुपूनस्तिर्यगालिख्य षट्कं
ब्राह्मावृत्यालिखतु विधिवद् बिन्दुयुक्त लकारम् ।
अन्तः पङ्क्तौ लिखतु धरणी शिष्टकोष्ठत्रयाणाम्
कृत्वा नामप्रथितमुदितं यन्त्रमेतज् ज्वघ्नम् ।६८
यन्त्रमेतत्सम्भ्यर्च्य दत्वा भूतबलिं ततः ।
साध्यस्य मूर्द्धनि बध्नीयात्सर्वज्वणविमुक्तये ।६६