शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary
लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)
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शूलाङ्किते वह्निगृहस्य युग्मे धूमावती उल्लिखेत् क्रमेण ।
मध्याग्निकोणेषु मरुद्गृहस्थं यन्त्रं हुताशनिलवर्णयेतम् ॥ १०
दान्तौ सार्धीश बिन्दुन्तो बोजे धूमावती द्विठः ।
धूमावती मनुः प्रोक्तः शत्रुर्निग्रहकारकः १११
विषेण कनकाम्भोभिः प्रेतकपटकल्पितम् ।
श्मशाने लिखनेदेतत् शत्रू नुच्चाटयेद्द्भ्रुतम् ।।२
हुताशगेहद्वितये लिखित्वा वैवस्वताय द्वित्ववर्णमन्त्रम् ।
मध्याम्तमाकल्पितमिन्दुबिम्बे यन्त्र महाभूतपिशाचवैरि । १३
नामा लिख्य मकारकोष्ठयुगजे कोणेषु तस्या यन्त्रगान् ।
मन्त्रज्ञो ङञणान्कारसहितान् धूमावतो यन्त्रवान् ।
वीतं घुंघुटिकादिना परमिदं वायुत्रिगेहावृतम् ।
यन्त्रं प्रान्तपरेतभूमिनिहितं विद्वेषण स्याद्विषाम् ॥१४
दो तारोंसे सम्पुटित यन्त्र अर्थात् आदि में तार और अन्तमें स्वाहा
कुरु कुल्ले मध्य में लिखे — यही इसका स्वरूप है इससे यह सात अक्षरों
वाला होता है। अग्नि के दोनों गृहों में मन्त्र कोण-विरों में लिखे तो
वह मन्त्र अति शीघ्र हीं भुजङ्गों का निहनन करने वाला होता है। यहाँ
पर 'कुरु कुल्ल' देवता है ।८। अब अन्य सर्पों का हनन करने वाला यन्त्र
बतलाया जाता है। यह सात अक्षरों वाला मन्त्र है। मेखला मे इसका
स्वरूप यह है कि आदि में ॐकार होता है विह्न गृह के युग्म में अग्नि
वधू मन्त्र को मध्यादि कोणोंमें भोज पत्र पर लिखकर यन्त्र को बनावे ।
यह यन्त्र रिपु और नागों का हरण करने वाला होता है ।६। विह्न गृह
के शूलांकित युग्म में क्रम से धूमावती मन्त्र को लिखना चाहिए ।
मध्याग्नि कोणों में मरुद गृह में स्थित मन्त्र को जो हुताश और अनिल
वर्ण से संयुत हो, दीर्घकार जो विन्दु से युक्त हों अर्थात् धूं-धूं हों—ये
बीज हैं। हुताश रेफ का नाम है। यह आठ अक्षरों का मन्त्र है, दो 'ठ'
हैं। यह धूमावती का मन्त्र है जो शत्रुओं के निग्रह करदे वाला होता
है। १०-११। किसी विष जल से तथा धतूरे के रस से प्रिय के वस्त्र पर