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शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary

लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished511 पृष्ठ

पृष्ठ 450, कुल 511 में से

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पृष्ठ 450

४५० ] [ श्रीशारदा तिलक
है ।१-२। यहाँ पर मातृका देवता है उसकी पूजा करके प्राण प्रतिष्ठापन
करे और फिर उसे धारण करना चाहिए । भूपुर के युग्म के पुटीकरण
में मध्यम साध्य से संयुत माया को लिखे । यहाँ सर्वत्र यन्त्रमें साधारण
प्रक्रिया बतलाई गई है । वहाँ पर षट् कर्म—मारण, मोहन, वशीकरण
स्तम्भन, आकर्षण, उच्चाटन इनमें यन्त्र में लिखना आवश्यक है । अब
मृत्युञ्जय मन्त्र बतलाया जाता है । मध्य में आठ दल वाली कर्णिका
दो निम्नलिखित विशेषणों से युक्त क्षकार के मध्यममें साध्य में का नाम
लिखे । साध्य कर्मके लिखने का प्रकार यह है—'क' आदिक को पद्मके
आगे के भागों में लिखना चाहिये । जिसके कोण में वकार हो ऐसे भूपुर
में संवेष्टित बहुत ऊँचा वश्य करने वाला होता है ।३। अब मृत्युञ्जय
नाम वाले यन्त्र को बतलाते हुए कहते है क्षान्त में अपने साध्य का
नाम लिखना चाहिए और पद्म के आठ दलों के नामसे सम्पुटित वर्णों
को लिखे । इसके अनन्तर उनके आगे पद्म से सम्पुटित यन्त्र को लिखे
यह मृत्युञ्जय नामक परमयन्त्र होताहैं । यह यन्त्र विष की वेदना ज्वर
शिर के रोगों का विनाश करने वाला होता है तथा श्री और जय के
प्रदान करने वाला है । कान्ति एवं पुष्टि का प्रदाता—वशीकरण कारक
और सभी कामों के अर्थ का साधक होता है ।४-५। अग्नि ग्रह में
चिन्तामणि (शैव) साध्य से युक्त लिखकर वाह्य में अनल गेह से युक्त
मन्त्र लिखे —यह यन्त्र ज्वर का शमन करने वाला होता है । सप्लवस
प्लावयस यन्त्र आठ अक्षरों वाला बताया गया है । यही यन्त्र ग्रह बाधा
से संयुत ज्वर का विनाश करने में दक्ष होता है ।६-७।
तारठद्वयपुट कुरुकुल्ले मन्त्रमन्त्रहुतभुक् गृहयुग्मे ।
मध्यकोणविरेषु लिखेत् तन् मन्त्रमाशु विनिहन्ति भुजङ्गान्
ओं कारमायादिकमेखलेऽग्निवभूमन्नु' वह्निगृहस्य युग्मे ।
मध्यादिकोणेषु विलिख्य भूर्ज यन्त्रं विदध्याद्रिपुनागसारि ।६