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शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary

लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished511 पृष्ठ

पृष्ठ 173, कुल 511 में से

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पृष्ठ 173

अष्टम पटल ] [ १७३
त्रिलक्षं प्रजपेन्मन्त्री साक्षाद्वैश्रवणोभवेत् ।
आराध्योत्तरनक्षत्रे देवीं स्रक्चन्दनादिभिः ४२
अस्त्र कमल रूपा के लिये है । ये नमः अन्त वाले तथा प्रणव आदि
वाले हैं । ये अङ्ग मन्त्र कहे गये हैं । अनन्य बुद्धिवाला होकर देवी का
ध्यान करना चाहिए । ३७। ध्यान और वन्दना बतलायी जाती है-देवी
कमल पर विराजमान है-मुख पर मन्द मुस्कान की छटा दिखाई दे
रही है-अपने कर कमलोसे वरदान-दो पद्म और अभयदान को धारण
किये हुईं हैं-देवी का शरीर विद्युल्लता के सदृश है । जिनके ऊपर
मोतियों की माला विराजमान है ऐसे स्थूल एवं समुन्नत स्तनों से
सुशोभित हैं-अपने कटाक्षों के वैभव के द्वारा श्री हरि को आनन्दित
करती हुए कमला देवी आपका परित्राण करें । ३८। अपनी इन्द्रियों को
जीत लेने वाला मन्त्र का ज्ञाता इस मन्त्र का दस लाख जप करे । जप
के दशम भाग को मधुर से अक्त कमलों के द्वारा आहुति देवे । ३६।
श्रीपीठ पर देवी का यजन करे और अङ्गों का यजन पहिले करना
चाहिए । वलाका आदि का इसके अनन्तर पूजन करे और फिर लोकेशों
के यजन की तीन आवृत्ति भी करे । ४०। इस रीति से देवी का भला
भाँति अभ्यर्चन करना चाहिए । वह यजन करने वाला सम्पदाओं का
निवास स्थान बन जाया करता है । महासागर में गमन करने वाली
सरिता में कण्ठ मात्र तक जल में स्थित होकर मन्त्रधारी को तीनलाख
जप करना चाहिए । इसके प्रभाव से वह साक्षात् वैश्रवण हो जाया
करता है । तीनों उत्तरा नक्षत्रों में माला पुष्प चन्दन आदि के द्वारा
देवी की आराधना करे । ४१।४२।
नन्द्यावर्तभवैः पुष्पैः सहस्रं जुहुयात्ततः ।
पौर्णमास्यां फलैर्बिल्वैर्जुहुयान्मधुराप्लुतैः ।४३
पञ्चम्यांविशदाम्भोजैः शुक्रवारे सुगन्धिभिः ।
अन्यैर्वाविशदैः पुष्पैः प्रतिमासं विशालधीः ।
स भवेदब्दमात्रेण सर्वदा संपदां निधिः ।४४