सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary

लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished511 पृष्ठ

पृष्ठ 149, कुल 511 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 149
  • सप्तम पटल ] [ १४६
    शंकरा र्धश रीरिणी, नारी, नारायणी, त्रिशूलिनी, पालिनी, अम्बिका,
    ह्लादिनी ये बत्तीस शक्तियाँ कहीं हैं । चक्र, हस्ता, पिशाचा, और उरु-
    भूषणा पूजने योग्य हैं । २६।३४।
    पिङ्गलाक्षी विशालाक्षी समृद्धिर्वृद्धिरेव च ।
    श्रद्धा स्वाहा स्वधाऽभिख्या माया संज्ञा वसुन्धरा ।३५
    त्रिलोकधात्री सावित्री गायत्री त्रिदशेश्वरी ।
    सुरूपा बहुरूपा च स्कन्दमाताऽच्युतप्रिया ।३६
    विमला चामला पश्चादरुणी पुनरारुणी ।
    प्रकृतिर्विकृतिः सृष्टिः स्थितिः संहृतिरेव च । ३७
    सन्ध्या माता सती हंसी मद्दिका कुब्जिकाऽपरा (१) ।
    वेदमाता भगवती देवकी कमलासना । ३८
    त्रिमुखी सप्तमुख्यान्या सुरासुरविमर्दिनी ।
    लम्बोष्ठी चोर्ध्वकेशी च बहुशीर्षा वृकोदरी । ३६
    रथरेखाह्वया पश्चाच्छशिरेखा तथाऽपरा ।
    गगनवेगा पवनवेगा च तदनन्तरम् ।४०
    ततोभुवनमालाख्या ततः स्यान्मदनातुरा ।
    अनङ्गाऽनङ्गमदना तथैवानङ्गमेखला ।४१
    अनङ्गकुसुमा विश्वरूपाऽसुरभयङ्करी ।
    अक्षोभ्यासत्यवादिन्यौ वज्ररूपा शुचिव्रता ।४२
    पिङ्गलाक्षी, विशालाक्षी, समृद्धि, वृद्धि, श्रद्धा, स्वाहा, स्वधा,
    माया, वसुन्धरा, संज्ञा, त्रिलोक धात्री, सावित्री, गायत्री, त्रिदशेश्वरी,
    सुरूपा, बहुरूपा, स्कन्दमाता, अनुच्युत प्रिया, विमला, अमला, अरुणी,
    आरुणी, प्रकृति, सृष्टि, स्थिति, संहृति, सन्ध्या, माता, सती, हंसी,
    मद्दिका, कुब्जिका, अपरा, देवमाता, भगवती, देवकी, कमलासना,
    त्रिमुखी, सप्तमुखी, अन्या, सुरासुर विमर्दिनी, लम्बोष्ठा, ऊर्ध्व केशी,
    बहुशीर्षा, वृकोदरी, रथरेखा, शशिरेखा, अपरा, गगन, वेगा, पवन,