शालिहोत्रम्: अश्वशास्त्र (महर्षि शालिहोत्र - प्राचीन भारतीय अश्व-चिकित्सा एवं लक्षण विज्ञान)
Shalihotram Ashvashastra of Maharshi Shalihotra
महर्षि शालिहोत्र द्वारा
॥ तरजी अबंद ॥
रिहा करदे अरे सैयाद अब फसले बहारी है।
कफस में कब तलक तडफूं निहायत बेकरारी है ॥
दोहा-विरह रोग तनमन दहै, कल न पड़े दिनरैन ।
विधना काहूके कहीं, लागें हाय न नैन ॥
नहीं ज़खमी बचा इसका यह वह पैनी कटारी है।
रिहा करदे अरे सैयाद अब फसले बहारी है ॥
दोहा--प्रीत रीत तुम अगली, सबै दई बिसराय ।
ऐसी कोऊ करत है, जैसी तुम की हाय ॥
नहीं मालूम क्या हम से हुई तकसीर भारी है।
रिहा करदे अरे सैयाद अब फसले बहारी है ॥
दोहा-प्रीतम प्रीत लगाय तुम, छिपे कौन से देश ।
विरह रोग तनमें बसा, जटा जूट भये केश ॥
तरस आता है देखे से कि जो हालत हमारी है।
रिहा करदे अरे सैयाद अब फसले बहारी है।
दोहा-हमतौ तज कुलकान सब, कीनी तुमसंग प्रीत ।
तुम निर मोही निठुरहो, करन लगे विपरीत ॥
इसीका नाम उल्फत है यही क्या शर्ते यारी है।
रिहा करदे अरे सैयाद अब फसले बहारी है ॥४॥
दोहा-कहा न माना किसीका, कीनी तुनसन प्रीत ।
सोई फल पायो हमन, दैनलगे दुख मीत ॥
न कुछ तकसीर है उनकी ये सब किस्मतहमारी है।
रिहा करदे अरे सैयाद अब फसले बहारी है ॥५॥
दोहा-प्रीत करी सुख के लिये, तन मन धन बिसराय ।
सो लागी दुख दैन अब, कीजे कौन उपाय ॥
निहायत ऐसे जीने से हमारी जान आरी है।
... २४७
वक्त मौजूद हुये और वजीर लोग जोगनजी को लिवाने ग-
ये और कहा जोगनजी महाराज आपको बादशाह सलामत-
ने याद किया है ।।
जोगन-बाबा हम फकीर लोगों से बादशाह को क्या काम
अटका है ?
वजीर-काम की कोई बात नहीं है आपके मुख से कुछ गाना
सुनने की दरकार है ।।
जोगन-हम लोग गाना बजाना क्या समझें योंही अपनेतन-
ना रीरी कर दो घड़ी दिल बहलाते हैं
वजीर-आप का कहना दुरुस्त है मगर हमारी खादिमी पर
भी नजर करना चाहिये ।
जब इस कदर वजीर अहल्करों ने अर्ज गुजारिश की तौ
जोगनजी उनके साथ चलने को तयार हुईं और सवारी में बै-
ठ शाही बाग में जो कदम दिया तो वही खलकत बल्कि उ-
स से जियादह आलम पाया यह अपने आसन पर जा बैठी
अहलकारों ने यथोचित आदर सत्कार किया बाद आदरहो-
ने के इसने अपना सितार मिलाना शुरू किया कुछ बाजापखा-
वज किनारी वगैरा शाही भी मौजूद हुआ पहले तो जोगनजी
ने सितारमेंही वहगत निकाली कि अच्छे २ जो कामिल उस्ताद
लोग बैठेथे सब चकित होगये पखावज और किन्नारी इस कदर
मिली हुई बज रही थी कि अजब समां दरस रहाथा फिर जोगन
जीने यह राग गाना शुरू किया ॥
(खेमटा)
मोहन प्यारे आन दिखा दीदार ॥ तेरे कारन घर दर छांडा
छोड दिया परिवार । अब मोहन प्यारे आन दिखा दीदार ॥