शालिहोत्रम्: अश्वशास्त्र (महर्षि शालिहोत्र - प्राचीन भारतीय अश्व-चिकित्सा एवं लक्षण विज्ञान)
Shalihotram Ashvashastra of Maharshi Shalihotra
महर्षि शालिहोत्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंशालिहोत्रम् । ७१
सातवीं दवा—एलुआ, गूगुल, अफीम सुहागा, वायविडंग सब
को पांच २ माशे लेकर फंकी बनाकर तीन दिन तक घोडे को
खिलावे और गरम पानी पिलावे ।
आठवीं दवा—सुहागा; अजवायन खुरासानी, फिटकरी, गूगुल,
बेद इन्जीरकी कली इन सबको दो दो तोले लेकर एक खुराक
करै इस तरह तीन दिन तक दे और घोडे को गश्तदे तथा
नदीका पानी पिलावै ।
नवीं दवा—भैंसागूगल, मालकांगनी, हल्दी, तिवरसा गुड इन
सबको पाव २ भर लेकर दाना खाने से पहिले खिलावै ।
जौ गीरा, वादगीरा, आवगीरा और सीनागीरका इलाज ।
जो घोडा वक्त बे वक्त दाना और पानी खाता पीता है तथा
उसके हाजमा (पाचन शक्ति) पर ध्यान दिये बिना कच्चा
पक्का भोजन उसको खानेको दे दिया जाता है इसको जौगीरा
नामक बीमारी हो जाती है, वह सब बीमारी बुरी होती है ।
सीनागीर, आवगीर और जौगीरा इन सबका एकही
उपाय है।
दवा—घोडेको थोड़ी देरतक पानीमें तैरावे, या उसके दांतों की
जडमें नश्तर लगादे, या गधेकी चर्बीको एक बर्तन में पिघला
कर सिरसे पांवतक मले अथवा सुअरके पित्तेको पानीमें घोल-
कर पिलावै ।
अन्य दवा—आंबाहल्दी, सात पैसे भर, कच्चा सुहागा टकेभर,
गूगल टकाभर, फिटकरी पैसे भर, इस्पन्द एक पैसा भर और
साबुन चार पैसाभर सबकी तीन गोली बनाले और प्रातःकाल
एक गोली निहारमुख खिलावै ।