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शालिहोत्रम्: अश्वशास्त्र (महर्षि शालिहोत्र - प्राचीन भारतीय अश्व-चिकित्सा एवं लक्षण विज्ञान)

शालिहोत्रम्: अश्वशास्त्र (महर्षि शालिहोत्र - प्राचीन भारतीय अश्व-चिकित्सा एवं लक्षण विज्ञान)

Shalihotram Ashvashastra of Maharshi Shalihotra

महर्षि शालिहोत्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished130 पृष्ठ

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पृष्ठ 89

७८ शालिहोत्रम् ।
महेला खाने को देना अच्छा होता है और सवारी भी लेना
अच्छा होता है ।
पहिली दवा-अरंड की कोंपल' खारी नमक इनको पाव
भर कूटकर खिलावै । और पीनेको गरम पानी दे, ठंडा पानी
न पिलावै ।
दूसरी दवा-आककी जडकी छाल खूब धुलाई हुई टके भर,
गूगल टके भर, पाव भर गुडमें मिलाकर खिलावै ।
तीसरी दवा-आंवाहल्दी टकेभर, सज्जी टकेभर, गूगल दो
टके भर अफीम पैसे भर सबको पानी में घोलकर उस पानी में
जौंका आटा गूंदकर टिकिया बना लेवै इस टिकिया में ऊपर
की सब दवा भर भूभलमें दबा कर सेंकले, सिकने पर दवाओं
को निकाल कूट पीसकर छः मात्रा करले और खिला दे ।
चौथी दवा-इसपंद; अजवायन, गूगल; असगंध' ये सब समान
भाग मालकांगनी, लहसन पावभर, फिटकरी, सुहागा छटांक २
भर इन सबको कूट पीस सेर भर गुडमें १५ गोलियां बना कर
दोनों समय एक एक गोली देवै और लोहेका तपाहुआ पानी
पिलावै ।
पांचवीं दवा-नीला थोथा एक तोला, वडी हरड पाव भर
दोनों को सिरके में महीन पीसकर ४० गोलियां बनावै और
एक २ गोली सवेरे और संध्याको खिलावै ।
छठी दवा-हींग, भिलावा, कालीमिरच, वडी पीपल, कूट जीरा
सुहागा, गूगल, गुजराती बोल और हल्दी सबको कूट छानकर
छटांक भर रोज सात दिन तक खिलावै ।