शालिहोत्रम्: अश्वशास्त्र (महर्षि शालिहोत्र - प्राचीन भारतीय अश्व-चिकित्सा एवं लक्षण विज्ञान)
Shalihotram Ashvashastra of Maharshi Shalihotra
महर्षि शालिहोत्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंशालिहोत्रम् । ६६
इसकी दवा-काली मिरच और सोंफ प्रत्येक छटांक भर सोंठ
आधी छटांक, मिश्री सवा छटांक इन सबको कूट छानकर दस
दिन तक खिलावै ।
दूसरी दवा-काली मिरच सात तोले, सोंफ दस तोले, आंवला
छः तोले, कंजा छः तोले, मिश्री दस तोले इन सबको कूट
पीसकर दस दिन तक दोनों समय दे ।
तीसरी दवा-मुलहटो, बीदाना प्रत्येक छः तोले, किशमिस १
तोले सफेद जीरा सात तोले, काली मिरच, पीपल प्रत्येक सात
तोले, अदरख दो तोले सोंफ, मनुका और बबूलका गोंद प्रत्येक
दस तोले, इनमेंसे गोंदको पानीमें भिगोदे और ऊपर लिखी हुई
सब दवाओंको कूटकर गोंदके पानीमें गोलियां बना लेवे, एक २
गोली दोनों समय दे ।
चौथी दवा-प्याज दो सेर, कतीरा आध सेर दोनोंको पीसकर
मिलाले और आठ दिन तक दे ।
पांचवी दवा-धानकी भुसी पहरभर पेशाबमें भिगोकर दानेके
पीछे खानेको दे । और जे। श्वास बराबर चढ़ता हो तो सोंफ
धनियां, महदी के बीज, बायविडंग, आंवला, कतीरा इन सब
को आध आध पाव लेकर कूटले और जौके आटे में मिला
प्रातःकाल देवै ।
हिचकीका इलाज-जो बादी से हिचकियां आती हों तो मोंमि
याईकी एक गोली प्रातःकाल के समय दे । दूसरी दवा है कि
मोरपंख की राख शहद में मिलाकर देवै ।
सीने वंदका इलाज-जब घोडे के कंधे पर सुजन हो जाती है
तौ उसे सीनावन्द कहते हैं, यह रोग अजीर्ण से होता है। इसमें