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शालिहोत्रम्: अश्वशास्त्र (महर्षि शालिहोत्र - प्राचीन भारतीय अश्व-चिकित्सा एवं लक्षण विज्ञान)

शालिहोत्रम्: अश्वशास्त्र (महर्षि शालिहोत्र - प्राचीन भारतीय अश्व-चिकित्सा एवं लक्षण विज्ञान)

Shalihotram Ashvashastra of Maharshi Shalihotra

महर्षि शालिहोत्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished130 पृष्ठ

पृष्ठ 86, कुल 130 में से

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पृष्ठ 86

शालहोत्र । ६७
चौथी दवा-चार तोले कडुवा तेल लेकर उसको आग पर
गरम करले और उसमें चार तोले शहद तथा चार माशे पिसा
हुआ कायफल मिलाकर घोडे के नथनों में डाले तो निश्चय
आराम हो ।
सुर्फाका इलाज-यह बीमारी भी सर्दीसे होतीहै, इसमें घोड़ा
खांस खांसकर दिक होजाता है, जुकाम और सुर्फा दोनोंके लक्षण
समान हैं, सुर्फेमें जमाहुआ कफ पतला हो २ कर निकलता है।
इसकी दवा-उत्तम शहद आधसेर, बकरी का दूध आधसेर
और सोंठ, चेतरा नौ दिरम तीनोंको मिलाकर घोडेको पिलावे ।
दूसरी दवा-वङ्ग छः माशेको अदरखकी गांठमें रखकर आग
में भुल भुलाकर घोडे को खिलावे तो इससे खांस वन्द हो
जाती है । यह दवा तीन दिन दे ।
तीसरी दवा-सेरभर अजवायन को मनुष्य के पेशाब में भि-
गोकर कई दिन तक रक्खी रहने दे । फिर उसे साफ करके
कूट ले और दो दो पैसे भर नित्य दाना खाने के बाद घोडे
को खिलावे इसी प्रकार तीन दिन तक करे ।
चौथी दवा-सहजने की छाल छटांकभर ( हाल की काटी
हुई को ) बारीक पीस कर तीन दिन तक खिलावे ।
पांचवी दवा-ढाई पत्ता झाऊ का ( पत्ते पके हुए ) घोडे को
खिलावे तो खांस दूर हो जाती है ।
छठी दवा-पानी पिला कर पीछे घोडे को मिठाई खिलावे
किन्तु तीन दिन तक इसी प्रकार करे तो खांस दूर हो
जाता है ।
सातवी दवा-अदरख में अफीम भर कर ऊपरसे गेहूंका आटा