शालिहोत्रम्: अश्वशास्त्र (महर्षि शालिहोत्र - प्राचीन भारतीय अश्व-चिकित्सा एवं लक्षण विज्ञान)
Shalihotram Ashvashastra of Maharshi Shalihotra
महर्षि शालिहोत्र द्वारा
पृष्ठ 75, कुल 130 में से
संदर्भ में पढ़ें५६ शालिहोत्रम् ।
पहिली दवा-हरड, बहेडा और आंवला तीनों छटांक २ भर
लेकर कुचल डाले और रात्रि के समय भिगोदे, दिन निकलते
ही छान कर पिलादे इस तरह पांच छः दिन तक करने से
आराम हो जाता है ।
दूसरी दवा-रातके समय मिट्टी के घडे में जल भरकर उसमें
आधसेर शीशमकी पत्तियां डालदे, दिन निकलने पर हाथसे
पत्तियों को मसल कर छानले और उस जलमें पाव भर जौं का
सत्तू घोलकर पिलादे इसी तरह पांच चार दिन तक करने से
आराम होजाता है । पहिले दिनकी पत्तियां निकाल कर दूसरे
दिन भी काम में लाई जासक्ती हैं यह पत्तियां तीसरे दिन
बदलदी जाती हैं।
तीसरा उपाय-रातके समय मिट्टी के एक नवीन पात्रमें सेर
भर पानी भरकर उसमें छटांक भर कतीरा डालदो सबेरे के
समय उसे मिलाकर पिलादे ।
कमर के दर्दका इलाज-बहुधा चोट वा लचका खाजाने से
यह दर्द उत्पन्न होजाया करता है ।
पहिली दवा-थोडेसे चांवलोंका माढ निकालकर ठंडा करले,
इस माढमें घोडेकी पूंछकी डंडीको उलटकर डालदे परन्तु प्रथम
ही घोडेकी पिछाडी दृढतासे बांध देवै । जब दुम भीग जाय तब
पिछाडी खोलदे ऐसा करने से घोडा पूंछको बडे वेगसे फड
फडावैगा और लचक जाती रहेगी ।
दूसरी दवा-अंडीका गूदा दहीमें पीसकर तीन दिन तक कमर
पर लगावै और चौथे दिन गरम पानी से धो डाले ।