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शालिहोत्रम्: अश्वशास्त्र (महर्षि शालिहोत्र - प्राचीन भारतीय अश्व-चिकित्सा एवं लक्षण विज्ञान)

शालिहोत्रम्: अश्वशास्त्र (महर्षि शालिहोत्र - प्राचीन भारतीय अश्व-चिकित्सा एवं लक्षण विज्ञान)

Shalihotram Ashvashastra of Maharshi Shalihotra

महर्षि शालिहोत्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished130 पृष्ठ

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पृष्ठ 70

शालिहोत्र । ५१
वास्तव में कुरकुरी दो ही प्रकार की हैं अर्थात् एक तो मूत्र
बन्द होने से और दूसरी दस्तबन्द होने से और सब कुरकुरी
इन्हीं दो के अन्तर्गत होती हैं ।
खुजली का वर्णन-इससे सब देहमें घाव से होजाते हैं । यह
रोग संक्रामक होता हैं, एक को होते ही उस अस्तबल के सब
घोड़ों को हो जाता है, इससे पशु को बडी पीड़ा होती हैं ।
पहिली दवा-प्रतिदिन बासी पानी से धो दिया करे ।
दूसरा उपाय-दहीमें बारूद घोलकर पशुकी सब देहपर लगा
देवे और पांच छः घण्टे पीछे साबुनसे धो डाले । और इस दवा
करने के साथ ही धेला २ भर गंधक और सेंधा नमक जौ के
आटे के साथ प्रातःकाल खाने को दे ।
तीसरा उपाय-साबुन और चौथाई नमक दोनों को कूट कर
पोटली बना लेवे, और घोडेको स्नान कराते समय इस पोटली
से मलता रहे फिर जबतक दवा न सूख तबतक धूपमें बैठा रहने
दे । परन्तु उष्ण काल में विचार के रखना ।
चौथा उपाय-आधसेर खट्टा दही और पावभर नमक मिला
कर घोडेकी सब देहपर लगादे और चौबीस घण्टे पीछे धो
डाले, इसी तरह दो तीन दिन करने से आराम होजाता है ।।
पांचवां उपाय-हुक्के के पानी से भी दो दो तीन तीन बार
धोने से आराम होजाता है ।
छटा उपाय-खट्टा दही चार सेर, नीम की पत्ती आधसेर, का
ला जीरा पावभर, लहसन पावभर, काली मिरच आधपाव इन
में से दही को छोड़ सब दवाओं को पीसकर दही में मिला तीन