शालिहोत्रम्: अश्वशास्त्र (महर्षि शालिहोत्र - प्राचीन भारतीय अश्व-चिकित्सा एवं लक्षण विज्ञान)
Shalihotram Ashvashastra of Maharshi Shalihotra
महर्षि शालिहोत्र द्वारा
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दिन रख छोड़ें फिर घोडे को साबुन से धोयकर यह दवा लगा
धूप में खडा रक्खे ।
सातवां उपाय-ग्वार पाठे को नमक मिलाकर खिलादे । अनु-
सार माफिक ।
आठवां उपाय-सफेद सरबैंक एक छटांक, सुरती छटांक भर,
पानी सेर भर, चुनेका पानी डेढ पाव इनमें से पहिली दो दवा-
ओंको पानी में घोटा ले फिर चुनेका पानी मिलाकर घोडे की
देह पर लगादे ।
नवां उपाय-बाकूची, गंधक, मनमिल और वायविडंगइन सब
को बराबर लेकर कूटके और पानीमें रातके समय भिगो देवैं,
प्रातःकाल मथकर थोडासा कडवा तेल मिलाकर मर्दन करै तीन
घंटे धूपमें खडा रखने के पीछे मिट्टी लगाकर धो डाले ।
दसवां उपाय-खट्टे दही में वेद अंजीर मिलाकर तीन दिन
मले तीसरे दिन घोडेके देहपर पीली मिट्टी मलदे और चौथे
दिन पानी से धोडाले ।
ग्यारहवां उपाय-पाव भर कडवे तेलमें पैसे भर नील मिला-
कर घोडे के शरीर पर मलै पहर भर पीछे चिकनी मिट्टी लगा
कर गर्मी की ऋतुमें ठंडे पानी से और जाडे की ऋतुमें गर्म
पानी से धोडालै ।
गजचर्मका उपाय-इस रोगमें घोडेका चमडा हाथी के चम-
डेके समान खुर खुरा हो जाता है शरीर की चमक दमक मारी
जाती है ।
कासनी, कांजी, बच और भिलावा इनमें से सब दवाओं को