शालिहोत्रम्: अश्वशास्त्र (महर्षि शालिहोत्र - प्राचीन भारतीय अश्व-चिकित्सा एवं लक्षण विज्ञान)
Shalihotram Ashvashastra of Maharshi Shalihotra
महर्षि शालिहोत्र द्वारा
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चौथी दवा-काले गधे की लीद और केले की जड़ इन दोनों
का अर्क निकाल घोडे को लिटाकर पैसे पैसे भर दोनों नथनों
में डाल दे ।
दांतों की खटाई और जीभके सूखेपन का उपाय ।
जो घोड़ा दाना घास खाने को चाहे पर खा न सके तौ उस-
के दांतों में खटाई अथवा सूखापन होता है इसमें कनेर की
छाल पीस कर शहद में मिलाकर नीबू के बराबर गोली बना
चार दिन तक खिलावे ।
नासिका के कीड़ों का उपाय-कभी नाक से कीड़े झड़ते हैं
और दुर्गन्धित रुधिर निकला करता है । इसमें वच, त्रिकुटा,
त्रिफला इनको पीस कर इतने ही गुड़ में मिला घी में सानकर
खिलाना चाहिये ।
पानी में फिनाल मिलाकर पिचकारी द्वारा नाक भीतर से
धुलवानी चाहिये ।
रुधिरका वमन का उपाय-जो घोड़ा रुधिरको वमन करताहो
उसके लिये जामनकी छाल छाया में सुखा तीन अंडेकी सफेदी
मिला एक गोली प्रतिदिन प्रातःकाल सात दिनतक खानेको दे ।
दूसरी दवा-शातरा, हरड, आंवला इन तीनों को बराबर ले
पाव पावभर दोनों समय दाना देनेसे घण्टेभर पहिले दिया करे,
पानी ठीक समय पर पिलावे इस रोगको सरसंबूताभी कहतेहैं ।
सिर के रोग का लक्षण-जब घोडे के सिर में वात पित्त वा
कफ से दर्द होता है तौ उसकी कान्ति मन्द पड जाती हैं, चारा
दाना खाना छोड़ देता है, आँखों से पानी और मुख से लार
बहने लगती है ।