शालिहोत्रम्: अश्वशास्त्र (महर्षि शालिहोत्र - प्राचीन भारतीय अश्व-चिकित्सा एवं लक्षण विज्ञान)
Shalihotram Ashvashastra of Maharshi Shalihotra
महर्षि शालिहोत्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंशालिहोत्रम् । ५३
सिरके रोगका उपाय-शातरा, सोंठ काली मिरच, पीपल इन
सबको समान भागले पीसकर शराब में मिला सवेरे के समय
खिलावै ।
दूसरी दवा-नौसादर एक भाग, केशर चार भाग इन दोनों
को मिला माजूम बना सात दिन तक खिलावै ।
मुख रोगका लक्षण और दवा-इस रोगमें कफके साथ दुर्गन्ध
निकलती है, मुखकी रंगतकाली पड जाती है, दाने दाने से
निकल आते हैं और लगाम को नहीं चबा सकता है ।
इस रोग में तालूकी फस्द खोलना अच्छा है ।
दूसरा उपाय-सोंठ और पीपलको कूटकर चार सेर पानी में
औटावै जब आध सेर रह जाय तब पिलादे ।
मुखमें कांटोंका इलाज-इस रोगमें मुखके भीतर ऊपर नीचे
कांटे पड जाते हैं ।
पहिली दवा-कलमी शोरा, सैंधानमक, समंदर फेन, रसौत
इन चारोको समान भागले धायके फूलके रसमें मिला घोडे के
मुख में तीन दिन तक मलै ।
दूसरी दवा-धायके फूल, जड, पत्ती और छाल सब दो सेर
पानी में उबालकर घोडेके मुखमें गरम छिडके ।
तीसरा उपाय-किसी चमारसे उसके कांटे कटवा डालै फिर
आंबाहल्दी, कालाजीरा, और काली मिरच बराबर पीसकर
दिनमें दस बार मले ।
लवकामकी दवा-यह रोग दांतकी जडसे मिलकर होठ में
होता है । इसको नश्तरसे चीरकर मवाद निकाल डालै फिर
इसमें हल्दी और नमक पीसकर भरदे ।