शालिहोत्रम्: अश्वशास्त्र (महर्षि शालिहोत्र - प्राचीन भारतीय अश्व-चिकित्सा एवं लक्षण विज्ञान)
Shalihotram Ashvashastra of Maharshi Shalihotra
महर्षि शालिहोत्र द्वारा
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एक सफेद चादर और चाँदनी रात में एक काला कम्बल उसके
सामने डाले इसे देखकर जो वह न झिझके तो अच्छा समझे ।
( ५ ) दन्दागीर वह घोडा है जो बिना छेडे ही काट खाता
है उसमें यह स्वाभाविक दोष होता है उपाय करने पर भी नहीं
मिटता ।
जब घोडा खरीदना हो तो घुडशाल में अकेला जाना उचि-
त है उसके मालिक को संग न लेजाय । क्योंकि घोडेवाला ज-
हां तक बन सकेगा उसके दोष छिपाने का उद्योग करेगा घोडे
को घुडशाल में से निकालते समय खरीदनेवाले को उचित है
कि घोडे के पीछे रहे क्योंकि घोडेवाले बहुधा पीछे से कुछ
ऐसा कर दिया करते हैं कि वह चलने में तीव्र मालूम हुआ
करता है परन्तु वास्तव में निकम्मा होताहै जिस घोडेकी गर्दन
पर बाल घने होतेहैं वह सुस्त हुआ करताहै और जिसकी गर्दन
पर कम बाल हुआ करते हैं वह अच्छा हुआ करता है ।
आख्ता करने की रीति-जिस जगह घोडे को आख्ता करना
हो वहां की पृथ्वी समान हो और मिट्टी भी नरम हो, जिससे
कङ्कर पत्थर न चुभने पावें उस भूमि में घोडेको पटककर चारों
टांगें बांधदे और पांच चार आदमी इसे दृढतासे पकडे रहें
जिससे हिलने न पावे । फिर आख्ता करनेवाला अपने दाहिने
हाथ में एक तेज उस्तरा लेकर बांये हाथ से अंडकोष को पकड़
कर बडी सावधानीसे चमडेको चीरकर अंडोंकोनिकाललेवे और
धीरे २ इस तरह खींचे कि नस सहित निकल आवे । इस समय
जिस लोहेसे दागनाहो उसे पहिले ही से कोयलोंकी आगमें सु-