शालिहोत्रम्: अश्वशास्त्र (महर्षि शालिहोत्र - प्राचीन भारतीय अश्व-चिकित्सा एवं लक्षण विज्ञान)
Shalihotram Ashvashastra of Maharshi Shalihotra
महर्षि शालिहोत्र द्वारा
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कच्ची कहते है यह घोडा बोझ लादनेके योग्य नहीं होता ।
आहू शिकमकी पहचान-इस घोडेका पेट पीठ से लगा रहता
है कम खाता है इस लिये दुर्बल भी होता है यह घोडा शौकीन
लोगों के लिये अच्छा है ।
तवरगूंकी पहचान-जिसका पुट्ठा दुमतक झुका हुआ होता
है वह तवरगं कहलाता है ।
कुचलकी पहचान-जो घुटने टकराकर चलता है और जिसके
पिछले पांवों में घाव पड जाते हैं ।
कुशदहरूकी पहचान-दौडनेके समय चलने में जिसके पांव
चौडे पडते हैं और डामा डौलसा मालूम होता है, उसे कोई
अच्छा और कोई बुरा कहते हैं ।
घोडे के पांच अवगुणोंका वर्णन ।
जो घोडेमें नीचे लिखे हुए पांच अवगुण हों तो कभी न
लेना चाहिये और खरीदने वालेको उचित है कि बेचने वालेसे
कहदे कि जो इन पांच अवगुणों मेंसे कोई होगा तो एक सप्ताह
पीछे फेरदेंगे, ( १ ) कमरो वह कि जिसके ऊपर सवार होकर
चले और वह रुक जाय यह अडियल घोडा बुरा होता है ।
( २ ) कमखुर-यह घोडा दुबला पतला होता है इसे चाहे जि-
तना खिलाओ परन्तु यह मोटा नहीं होता और सूखी लीद
किया करता है ( ३ ) कुहनालंग उसे कहते हैं कि दो चार मं-
जिल करनेके पीछे लंगडाने लगता है ( ४ ) सबकोर वह है
जिसे रातमें कम दिखाई देता है वा किसी वस्तुको देखकर
झिफकने लगता है इसकी यह परीक्षा है कि अन्धेरी रात में