सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
शालिहोत्रम्: अश्वशास्त्र (महर्षि शालिहोत्र - प्राचीन भारतीय अश्व-चिकित्सा एवं लक्षण विज्ञान)

शालिहोत्रम्: अश्वशास्त्र (महर्षि शालिहोत्र - प्राचीन भारतीय अश्व-चिकित्सा एवं लक्षण विज्ञान)

Shalihotram Ashvashastra of Maharshi Shalihotra

महर्षि शालिहोत्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished130 पृष्ठ

पृष्ठ 50, कुल 130 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 50

शालिहोत्रम् । ३१
हो अर्थात एक आंख आदमीकी सी हो दूसरी हरिणकी सी हो
यह घोडा बहुत ही बुरा समझा जाता हे ।
शाखदारकी पहिचान-जिसके सिर, कंधे, माथे जुल्फ या चो-
टीके नीचे आदमी की छोटी उंगली का सा चिह्न पाया जाय
उसे शाखदार कहते हैं. यह बहुत अशुभ होता है ।
गोशदारके लक्षण-जिस घोडेके कानकी जड में एक और कान
सा होता है, उसे गोशदार कहते हैं यह भी बुरा होता है।
थनीकी पहचान-जिस घोडेकी गुह्येन्द्रीकी बाहर की त्वचापर
छुहारे के समान दो थन लटकने हों उसे थनी कहते हैं । यह
भी बुरा होता है ।
अनी के लक्षण-जो थन के से चिन्हों पर लटके हुए न हों वह
अनी कहलाता हे यह घोडा अच्छा कहाता हे ।
एकांड के लक्षण-जिस घोडे के अंडकोष मुहरेदार हों अथवा
एक ही हो यह बुरा होता हे ।
अरुनाधारकी पहचान-जिस घोडेके अंडपर कुछ सीवनकासा
चिन्ह हो और थैली साफ हो उसे अरुनाधार कहते हैं, यह
घोडा अच्छा होता है ।
शुतरदंदान की पहचान-जिसके ऊंटके से बडे दांतहों, गिनती
में न्यूनाधिक हों, एकके ऊपर एक चढ गयाहो, अथवा एकही
दांत हो उसे उष्ट्रदंत कहते हैं, यह बुरा समझा जाता है ।
गजदंतकी पहचान-जिस घोडेका दांत हाथी वा सुअरकी त-
रह बाहर निकला हो वह अच्छा नहीं होता है ।
सगजुबानके लक्षण-जिसको जिह्वा सर्प वा कुत्तेकी तरह लट
की हुई हो उसे भी बुरा समझते हैं ।