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शालिहोत्रम्: अश्वशास्त्र (महर्षि शालिहोत्र - प्राचीन भारतीय अश्व-चिकित्सा एवं लक्षण विज्ञान)

शालिहोत्रम्: अश्वशास्त्र (महर्षि शालिहोत्र - प्राचीन भारतीय अश्व-चिकित्सा एवं लक्षण विज्ञान)

Shalihotram Ashvashastra of Maharshi Shalihotra

महर्षि शालिहोत्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished130 पृष्ठ

पृष्ठ 49, कुल 130 में से

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पृष्ठ 49

३० शालिहोत्रम्
है परन्तु ईरानी मुग़ल इसे अशुभ समझते हैं।
अरजल के लक्षण-जिसके संपूर्ण देहका रंग एक प्रकार काहो
और एक पांव दूसरे रंगका हो वह घोडा बुरा समझा जाता
है इसे हिन्दी में यमदूत कहते हैं।
फूलका लक्षण-मुश्की, जर्दा, छल्ला, कुम्मैत कैसा हो हो उ-
सके चार जामेके तंग के बाहर सफेदी के दागहों, अथवा एक
या दोनों पुट्ठोंपर हों उसे फूल कहते हैं यह घोडा बुरा समझा
जाता है।
कृष्ण तिलके लक्षण-खंग या नुक्तरे पर फुलवारी की तरह
काले फूल हों, यूजपर सफेद या जर्द फूल हों और जर्देपर
गुलाब के सदृश फूल हों, तौ अच्छे समझे जाते हैं और
इनके सिवाय जो रङ्गत होती हो वह बुरी समझी जाती है।
शकल के लक्षण-जिसके भिन्न २ हाथ पांव सफेद हों जैसे
दाहिने हाथ और बांया पांव सफेद हों अथवा बांया हाथ और
दाहिना पांव सफेदहो वह शकल कहलाता है, यह घोडा
बहुत ही बुरा समझा जाता है।
आंख के दोषों का वर्णन-आंख में कई रङ्ग हों, कञ्जई, सुलै-
मानी, पीली वा सुनहरी कितने ही रङ्ग की हो एक आंख एक
रङ्ग की हो, दूसरे रङ्गकी दूसरी हो अथवा आंखें सुअर, बन्दर
वा कबूतर की सी हो ऐसा घोड़ा बुरा समझा जाता है।
चुगर की पहिचान-जिस घोडे की आंखें आदमी की सी
हों और कद छोटा हो वह घोडा अच्छा समझा जाता है।
ताफी की पहिचान-जिसकी एक आंख काली दूसरी सफेद