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शालिहोत्रम्: अश्वशास्त्र (महर्षि शालिहोत्र - प्राचीन भारतीय अश्व-चिकित्सा एवं लक्षण विज्ञान)

शालिहोत्रम्: अश्वशास्त्र (महर्षि शालिहोत्र - प्राचीन भारतीय अश्व-चिकित्सा एवं लक्षण विज्ञान)

Shalihotram Ashvashastra of Maharshi Shalihotra

महर्षि शालिहोत्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished130 पृष्ठ

पृष्ठ 48, कुल 130 में से

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पृष्ठ 48

शालिहोत्र । २९
सितारा पेशानी के लक्षण-जिसके माथेपर सफेद बाल नख के
समान अर्द्ध गोलाकार हों और जो अंगूठे से ढक जाते हों उसे
सितारा पेशानी कहते हैं, यह घोडा अशुभ होता है। चाहे ऐसे
घोडे के हाथ पांवों में सफेदी हो।
पटल के लक्षण-जिसके मस्तकपर नील कमल के समान चांद
सूरज बने हों उसे पटल कहते हैं, यह घोडा शुभ होता है।
अकवर के लक्षण-जो घोडा पटल, सितारा पेशानी वा शको-
लकी सूरतहोवे परन्तु साफ न हो और जैसे चन्द्रमा में झांई
होती है वैसेही सफेदी में कुछ रंगीन बाल लिपटे हुए, गोल वा
छिटके हुए से होते हैं। इन लक्षणों से युक्त घोडे को अकवर
कहते हैं। यह घोडा अशुभ होता है।
मुतलकुद्दीन के लक्षण-जिसके चारों हाथ पांव सफेद हों,
जिसके दोनों हाथ सफेद हो, या दोनों पांव ही सफेद हों अथ-
वां बांया हाथ सफेद हो, वा जिसके पांव के मोजे (नीचेके भाग)
सफेद हों। ये घोडे बहुत अच्छे होते हैं। इन घोडे के
नाम मुतलकुद्दोन, मुतलकुलयसार, और मुतलकुल रजलैन
कहते हैं।
गुलदस्तके लक्षण-जिसका हाथ सफेद होता हैं उसे गुलदस्त
कहते हैं यह बुरा नहीं समझा जाता है
चम्पदस्त की पहंचान-इसका दाहिना हाथ घुटने तक सफेद
होता है, यह बुरा हैं।
पद्म के लक्षण-जिनके हाथ पांवों की सफेदी में तिल होते हैं
यह घोडा पद्म कहाता है। इस देश में इसे बुरा नहीं समझते