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शालिहोत्रम्: अश्वशास्त्र (महर्षि शालिहोत्र - प्राचीन भारतीय अश्व-चिकित्सा एवं लक्षण विज्ञान)

शालिहोत्रम्: अश्वशास्त्र (महर्षि शालिहोत्र - प्राचीन भारतीय अश्व-चिकित्सा एवं लक्षण विज्ञान)

Shalihotram Ashvashastra of Maharshi Shalihotra

महर्षि शालिहोत्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished130 पृष्ठ

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पृष्ठ 45

२८ शालिहोत्रम् ।
ये नेपालमें देवीपाटन से आते हैं ( ५ ) तुर्की टांगन-ये तुर्कि-
स्थान से आते हैं ( ६ ) कुर्दी टांगन कुर्दिस्थान से आते हैं ।
इनके सिवाय और भी अनेक प्रकारके घोडे होते हैं, जो अपने
देश भेद से भिन्न २ प्रकार के होते हैं ॥
इनके सिवाय और भी अनेक स्थानों के अनेक प्रकारके घोडे
होतेहैं उन सबका वर्णन करना इस जगह बन नहीं सकता है ।
रंगके अनुसार घोडोंके नाम-असली घोडे चार रंगके होते हैं
( १ ) नुकरा, ( २ ) मुश्की, ( ३ ) सुर्खा और ( ४ ) जर्दा ।
नुकरेके लक्षण-इस घोडेका रङ्ग चारों सुम्मोंतक सफेद मोती
के समान चमकदार होता है ।
मुश्कीकी पहिचान-मुश्की घोडा काली कोयल से भी काला
होताहै। सुर्खाकी पहिचान-यह घोडा केशरके रंगके समान होता है
जर्दाकी पहिचान-अलसी सुवर्णके से रंगवाला अथवा मशाल
की लौके समान चमकदार जर्दा कहलाता है । इन चारों के सि-
वाय घोडे और और रंगतके भी होतेहैं, वे सब इन्हीं चारों के
अवान्तर भेद हैं जैसेः-
रहदा, मंगल, समंदर, फुलवारी, काठुआ, चाल, सन्दली, मगसी
सरगा, चीत्री, सुरंग, संजाब, गर्रा, चौधर, हरा गर्ग, महताब,
दोरद, खजरई, सनवानी, मुर्गा; टपर, फिरोजी नीला, अरूकूक
पतंग, टपाक, घुरकुल्ला, मन्होर, खीटा, सब्जा, श्यामकर्ण,
फाखताई, कचम्भा, अर्जन, सुनक, लक्खा; पदमकल्याण; परियल,
बारू, अबतक, सूहा, बादामी, कुम्मेत, इकरंग, तुःही, विल्लौरी,
खुतंग, गर्गामरगा, बाघंबरी, विल्ली, ये सब ५२ प्रकारके भेदहैं ।