शालिहोत्रम्: अश्वशास्त्र (महर्षि शालिहोत्र - प्राचीन भारतीय अश्व-चिकित्सा एवं लक्षण विज्ञान)
Shalihotram Ashvashastra of Maharshi Shalihotra
महर्षि शालिहोत्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंशालिहोत्रम् । २७
अबलक की रंगत-जैसे कुम्मेत कितने ही रंग का होता है
उसी तरह अबलक के भी कितने ही भेद हैं । अबलक हिसार्द,
पीला, लाल, उजला और नीले रंगका होता है । कुम्मेत तेलिया
और लाखौरी रंगका होताहै । खंगका अर्थ सफेद है, यह खंग
घोडा कई प्रकार का होता है जैसे:-नुकरा, खंग, सब्ज रंग यूज
खंग; सुर्ख खंग ।
इन रंगोंके सिवाय और रंग के घोडे देखनेमें नहीं आतेहैं।
घोडे को लेते समय प्रथम ही उसकी चोटी और दुम की
परीक्षा करनी चाहिये ।
सर्गा आदि घोडों की परीक्षा ।
( १ ) घाकरा-इसका माथा सफेद होता है । ( २ ) खदहम
इसका रंग काला होता है । ( ३ ) मुजाहिल जिसके दाहिने
हाथ पांव सफेद होते हैं । ( ४ ) जरसम इसका ऊपर का होठ
सफेद होता है । ( ५ ) वोहताद । ( ६ ) अश्कर यह सिर से
पैर तक लाल रंग का होता है । ( ७ ) कुम्मेत यह तेलिया,
लाखौरी या छुहारे के रंग का होता है ।
जिसकी देह का रंग बादामी, किशमिशी वा छुहारे का सा
होवे और चोटी तथा दुमका रंग मैलाहो उसे कुल्ला कहते हैं ।
जिसकी देह पर सिंह की सी चित्तियां होती हैं, उसे वाघंबरी
कहते हैं ।
जिसकी देह का रंग बादामी तथा दुम घुटने और हाथ पांव
काले हों वह समन्द होता है ।
जिसकी सेली और कान कालेहों देहपर छोटी २ वा वडी २
पास पास वा अलग अलग धारियां हों उसे अवस कहते हैं