शालिहोत्रम्: अश्वशास्त्र (महर्षि शालिहोत्र - प्राचीन भारतीय अश्व-चिकित्सा एवं लक्षण विज्ञान)
Shalihotram Ashvashastra of Maharshi Shalihotra
महर्षि शालिहोत्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंशालिहोत्रम् । २५
काठियावाड के घोडे बहुत अच्छे होते हैं इन्हें काठियावाडी
कहते हैं, ये घोडे ग्यारह प्रकारके होते हैं; जैसे-चादरिया, मा-
किया, मांग़लिया, ताजनियां, रेडिया, लखमियां, रेशमियां, देश-
रियां, हरनियां बादलिया और मोटरियां ।
मारवाडी घोडे मारवाड से आते हैं ये चार प्रकारके होते हैं
जैसेः-डहा, राजघडा, बालेवडा और तलवाडा ।
दक्षिणी घोडे-यह घोडे दक्षिणसे आतेहैं, ये मिली हुई नस्ल
के होतेहैं अर्थात् अर्त्री और काठियावाडी से मिलकर उत्पन्न
होतेहैं. इनमें से भीमरा; मकुन्दासी, कन्दासी और नागपुरी
बहुत अच्छे होते हैं ।
सिन्ध देशके घोडे सिन्धी कहलाते हैं।
पंजाब के घोडे पंजाबी कहलाते हैं, परन्तु सिंधी और पंजाबी
दोनों दोगले होते हैं. ये ईरानी और हिन्दुस्तानी घोडों से
उत्पन्न होते हैं, यह भी चार प्रकार के हैं. जैसे:-धन्नी, घेप,
सायडू और भटंडा ।
मालवी घोडे-यह घोडे मलवा देशमें होतेहैं, परन्तु वहां अ-
नेक प्रकारके घोडे रहने से मिली हुई नस्लके होते हैं ।
टांगन घोडे-ये घोडे बहुत छोटे और सुन्दर होते हैं। छोटे
होने ही के कारण इनको टांगन कहते हैं, येछः प्रकार के होते
हैं यथाः-
(१) वर्म्मापेगू-यह प्रायः ब्रह्मासे आते हैं। (२) मनीपुरी ये
मनीपुर के होते हैं। (३) भूटानी भुटानसे काफरी गुट आते
हैं। यहांके घोडोंको भोटियाभी कहते हैं। (४) नेपाली टांगन