शालिहोत्रम्: अश्वशास्त्र (महर्षि शालिहोत्र - प्राचीन भारतीय अश्व-चिकित्सा एवं लक्षण विज्ञान)
Shalihotram Ashvashastra of Maharshi Shalihotra
महर्षि शालिहोत्र द्वारा
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घोडे की गति-संस्कृत में घोडे की गति पांच प्रकार की
लिखीहै यथाः-आस्कन्दित, धौरितक, वल्गित, प्लुत और रेचित
(१) आस्कन्दित गति-वह है जिसमें घोड़ा क्रोधित मनुष्य
की तरह सिरको झुकायेहुए चारोंचरणोंसे दुरकी भरकर चलता है।
(२) धौरितक गति-इसके चार भेद हैं यथा-धौरितक, धौर्य,
धोरण और धोरित। नकुल की तरह चलने को धौरितक,
कौवारी पक्षीकी तरह चलने को धौर्य, मोरकी तरह नृत्य करते
हुए चलने को धोरण और वाराह के सदृश गति को धोरित
कहते हैं। इसी में एक 'धाण' गति भी लिखी है जिसमें
घोडा ऐसे वेग से दौड़ता है कि न कुछ सुन पड़ता न देख
पड़ता है।
(३) वल्गित गति-जो घोडा ऊंचा मुख करके और रीर
दवा कर चलता है उसे वल्गित कहते हैं।
(४) प्लुत गति-हरिणों की तरह चौकडी भरकर वा मंडूक
की तरह चलने को प्लुत कहते हैं।
(५) रेचित-जो समान चाल से चलता है अर्थात् न वेगसे
न धीरे से उसकी गति को रेचित कहते हैं।
फारसी ग्रन्थों के अनुसार ।
(१) रपट-उछलकर अत्यन्त वेगसे चलनेको रपट कहते हैं।
(२) छारतक-उछलकर धीरे से चलनेको छारतक कहते हैं।
(३) दुलकी-सब देहको हिलाकर चलना दुलकी कहलाता है।
(४) कूदना-अगले दो पैर उठाकर चलने को कूदना
कहते हैं।
(५) कदम-कदम चार प्रकार के होते हैं (१) सागम उस