शालिहोत्रम्: अश्वशास्त्र (महर्षि शालिहोत्र - प्राचीन भारतीय अश्व-चिकित्सा एवं लक्षण विज्ञान)
Shalihotram Ashvashastra of Maharshi Shalihotra
महर्षि शालिहोत्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंशालिहोत्रम् । ९९
सर्पिणी की पहिचान-कंथों को जड़ में बालों के पास जो
भौंरी होती है वह बुरी होती है ।
खूंटीगाठकी पहिचान-किसो २ घोडे के हाथ पर भौंरी होती
है, जो भौंरी का मुंह नीचे को होवे तो अच्छी समझे और
गांठ के नीचे की ओर बाहर वा भीतर की ओर होवे तो कोई
उसे बुरा और कोई अच्छा बताते हैं ।
खूंटी उखाड़ की पहिचान-जो भौंरी का मुख ऊपर की ओर
होता है तो अशुभ होती हैं ।
भुजबद्ध की पहिचान-जिस घोडे की भुजा पर भौंरी होती
है, वह बड़ा पराक्रमी होता है ।
छत्र भङ्ग की पहिचान-जिस घोडे की पीठ पर अथवा जीन
के नीचे भौंरी होती है उसे छत्रभंग कहते हैं यह भौंरी अशुभ होती है।
हरदावलकी पहिचान-छातीपर वा दोनों हाथोंके जोडपर जो
भौंरी होती है उन्हें हरदावल कहते हैं ये बहुत बुरी होती है।
गामकी पहिचान-नाभिके सन्मुख जो पेटके ऊपर भौंरी होती
है उसे गाम कहते हैं उसे कोई शुभ बताता है और कोई अ-
शुभ, मरहटे लोग ऐसे घोडे को लेना नहीं चाहते हैं ।
देवमन की पहिचान-जो भौंरी कंठमणि के निकट वा कुछ
ऊपर नीचे भी हो तो यह बहुत शुभ होती है, इसके होने पर
सहस्र दूषण भी कुछ नहीं कर सक्ते हैं ।
गङ्गापाट की पहिचान-यह भौंरी पेट पर होती है, जो यह
भौंरी तङ्ग के भीतर आजाय तो अच्छी होती है और तङ्ग से
हटने पर बुरी समझी जाती है ।