शालिहोत्रम्: अश्वशास्त्र (महर्षि शालिहोत्र - प्राचीन भारतीय अश्व-चिकित्सा एवं लक्षण विज्ञान)
Shalihotram Ashvashastra of Maharshi Shalihotra
महर्षि शालिहोत्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंशालिहोत्रम् । ६
अधिक आवश्यकता है मलमूत्र और सडी घासको बहुत दूर
फेंकवाना चाहिये क्योंकि सडाहटके कारण मच्छर मक्खी इकट्ठे
होकर पशुको बडा कष्ट पहुंचाते हैं उनको दूर रखने के लिये
कोई पतला कपडा घोडे पर डाल देना चाहिये ।
खाने पीनेका वर्णन-सबसे उत्तम खानेकी वस्तु घोडे के लिये
सूखी दूब है. इससे किसी प्रकारकी हानि नहीं पहुंचती और
यह हर समय देनेके योग्य है, घोडा इससे बहुत प्रसन्न रहता है
दूबको लाकर धोडालनी चाहिये और फिर सुखाकर घोडे को
खिलावे । घोडेके पेटमें इतनी अधिक जगह नहीं होती है कि
वह एक दमसे इतनी घास खाले जो बहुत देरतक काम देसके
इस लिये थोडी थोडी देरके पीछे थोडी थोडी घास देनी चाहिये,
इससे अधिक लाभ होगा, अजीर्ण आदि उदर रोग न होने पा-
वेंगे । कभी २ थोडी गाजर खिला देनेसे घोडे को अत्यन्त लाभ
होगा । परन्तु बहुत गाजर खिलाना हानि कारक है इससे पेट
फूलने का डर रहता है ।
घोडेकी शारीरिक शक्ति बढाने के लिये दिनमें दो बार दाना
देना चाहिये. दानेके लिये चना सबके उत्तम वस्तु है, बेदला वा
दला हुआ चना कुछ देर भिगोकर तोबडे में भरकर घोडेके मुखसे
बांध दिया जाता है इस दाने के साथ कभी थोडासा नमक भी
मिलाकर दिया जाता है। प्राचीन कालमें घोडोंके बांधने के स्थान
में सैन्धव नमकके बडे बडे ढेले रक्खे जाते थे. जिन्हें घोडा जब
चाहता था चाट लिया करता था ।
पीनेके लिये निर्मल पानी देना चाहिये. वर्षाऋतुमें नदीका पा