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शालिहोत्रम्: अश्वशास्त्र (महर्षि शालिहोत्र - प्राचीन भारतीय अश्व-चिकित्सा एवं लक्षण विज्ञान)

शालिहोत्रम्: अश्वशास्त्र (महर्षि शालिहोत्र - प्राचीन भारतीय अश्व-चिकित्सा एवं लक्षण विज्ञान)

Shalihotram Ashvashastra of Maharshi Shalihotra

महर्षि शालिहोत्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished130 पृष्ठ

पृष्ठ 24, कुल 130 में से

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पृष्ठ 24

शालिहोत्रम् । ५
जिसके मस्तक पर एकके ऊपर एक लगा तार तीन आवर्त
हों तो उसे निश्रेय वा निश्रेणी कहते है, यह घोडा बल और
वृद्धि करने वाला होता है ।
जिसके कंठमें उत्तरोत्तर तीन आवर्त होते हैं वह भी उत्तम
होता है जिस घोडेकी पीठके बांसे पर एक आवर्त होता है,
वह अशुभ और भ्रमोत्पादक होता है ।
जिसके लिलाट में चन्द्र सूर्य नामक दो आवर्त हों और पास
पास हो तौ राज्य की वृद्धि कराने वाला होता है ।
जिसके बांये कपोलपर एक आवर्त होता है वह घोडा यम
कहता है यह अपने मालिक का नाश चाहता है ।
जिसके दक्षिण कपोल पर एक आवर्त होता है. उसे शिव कहते
हैं यह सुखकारक और अपने मालिक को शुभ होता है ।
जिस घोडे के कान के मूलमें और कानके मध्यमें एक एक
आवर्त होता हे उसे विजय कहते हैं. यह संग्राम में विजय
सूचक होता है ।
जिसके स्कंध प्रदेश में एक कमलाकार आवर्त होता है वह
पद्म संज्ञक स्वामी को शुभकारक होता है ।
जिसकी नासिका के मध्य भागमें एक अथवा तीन आवर्त
हों उस घोडे को चक्रवर्ती कहते है यह घोडा राजाओं के योग्य
होता है ।
जिसके कंठ भाग में एक बडा भारी आवर्त दिखाई देता हो
वह चिन्तामणि नाम घोडा बडा शुभ होता है ।
जिसके तालुपर दो आवर्त होते हैं उसका नाम शुक्ल है
यह घोडा शुभ होता है ।