शालिहोत्रम्: अश्वशास्त्र (महर्षि शालिहोत्र - प्राचीन भारतीय अश्व-चिकित्सा एवं लक्षण विज्ञान)
Shalihotram Ashvashastra of Maharshi Shalihotra
महर्षि शालिहोत्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंशालिहोत्रम् । ३
समान होता है, पीला रंग हल्दी के समान और सारङ्ग चित्रवि-
चित्र रङ्ग होता है, जिसे कबरा कहते हैं । कपिलवर्ण पिशंग
कहाता है, दूब के समान रंगवाले को नीलक तथा जामुन के
फल के सदृश रंग काला होता है ।
जिस घोडे में पीली दमक मारती हो और पांव उसके सफेद
हो, तथा नेत्र काले हों उसे चक्रवाक कहते हैं यह घोडा राजा-
ओं के योग्य होता है ।
जिस घोडे के मुख पर चन्द्रमाकी किरण के समान आवर्त
अर्थात् भोंरी हो, जामुन के फल के समान आकृति हो, पांव
सफेद हों उसे मल्लिक कहते हैं ।
जिस घोडे का सब रंग सफेद हो, केवल एक कान काला हो
उसे श्याम कर्ण कहते हैं, प्राचीन समय में यही घोड़ा अश्वमेध
यज्ञ के काम में आता था ।
जिसका सम्पूर्ण वर्ण सफेद हो परन्तु पांव काले हों, यह यम-
दूत संज्ञक घोडा अशुभ होता है ।
जिसके पांव सफेद हों, पूंछ, छाती, मुख और सिर के बाल
काले हों वह अष्ट मंगल कहाता है ।
जिसके रोम देखने से वर्ण की प्रतीति न हो सकती हो वह
पुष्य संज्ञक कहाता है यह घोडा रखने योग्य नहीं होता है ।
जिस घोडे के पांव सफेद और मुख मध्यम होता है उसे पञ्च-
कल्याण बोलते हैं, यह घोड़ा शुभ होता है ।
शुभाशुभ लक्षण-जिन घोडों के मुख दीर्घ परन्तु सूक्ष्म मास
से युक्त होते हैं वे घोडे शुभ होते हैं । जिनके कंधे ऊँचे; मुख