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शालिहोत्रम्: अश्वशास्त्र (महर्षि शालिहोत्र - प्राचीन भारतीय अश्व-चिकित्सा एवं लक्षण विज्ञान)

शालिहोत्रम्: अश्वशास्त्र (महर्षि शालिहोत्र - प्राचीन भारतीय अश्व-चिकित्सा एवं लक्षण विज्ञान)

Shalihotram Ashvashastra of Maharshi Shalihotra

महर्षि शालिहोत्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished130 पृष्ठ

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पृष्ठ 124

शालिहोत्र। १०५
सोंफ, सफेद जीरा और मूलीके बीज नौ दिरम पीसकर सात
दिन तक खिलावै ।
बारहवां नुसखा-घोडेको पसीना बहुत आता हो तथा जो
थोडी मेहनत से ही घबरा जाता हो उसको दो दाम गेरू
शकर में मिलाकर खिलावै ।
तेरहवां नुसखा-जिस घोडे को डोमडे लोग गोली खिला
देते हैं वह बहुधा मर जाता है, क्योंकि उसका इलाज बहुत
मुश्किल से होता है किन्तु एक डाक्टर ने उसके लिये नुसखा
बतलाया है ।
( १ ) दो या चार गिरगिटों को पानीमें जोश देकर उस
पानीको नली द्वारा घोडे को पिलावै ।
( २ ) करण्डाकी पेडएक मंगाकर उसकी कड़ी लकड़ी दूर
करके शेष पत्ता, फूल कांटे और फल सबको औटाकर उसमें से
आध सेर पानी घोडे को पिलावै ॥
चौदहवां नुसखा-जिस घोडे की चोटी और दुमके बाल न
बढते हों उसके बालों को साठी चावलों के धोवन से धोवै
अथवा आंवला, कायफल और मेथी तीनों को कूटकर कपड
छन करके थोडे पानी में मिला कर गुनगुना कर सवेरे और
संध्या दोनों समय धोया करै ।
पन्द्रहवां नुसखा-जो घोडा दांत मारता है वह बुरा होताहै
क्योंकि वह बहुधा आदमी पर चोट करता है उसका यह इलाज
करै कि साईस लौकी या बेंगन खूब गरम करके तयार रक्खे
और जब वह घोडा किसी आदमी पर दांतमारै तभी उस लौकी