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शालिहोत्रम्: अश्वशास्त्र (महर्षि शालिहोत्र - प्राचीन भारतीय अश्व-चिकित्सा एवं लक्षण विज्ञान)

शालिहोत्रम्: अश्वशास्त्र (महर्षि शालिहोत्र - प्राचीन भारतीय अश्व-चिकित्सा एवं लक्षण विज्ञान)

Shalihotram Ashvashastra of Maharshi Shalihotra

महर्षि शालिहोत्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished130 पृष्ठ

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पृष्ठ 118

शालिहोत्र । ६९
हाजमे का चूर्ण - जिस घोडे की पाचनशक्ति ठीक न हो उसको
दवा रातिब खिलाने के पश्चात् नित्य देवै ।
दवा-कचरी, राई बेंगलामला, सोंठ घोडावच, हर्रा पाक सोंजर
और कालानमक सबको बराबर लेकर कूट छानले और उसमें आध
पाव चूर्ण महेले में मिलाकर घोडेको खिलावैं और कायदा रक्खै !
पचलोटा बनाने की विधि-यह नुसखा सूजन, बादी और
कफ को बहुत लाभदायक है इससे घोडा मोटा होताहै और पाच-
न शक्ति ठीक होती है ।
कालीजीरी, चीता, सोंठ, पिरन, घोडावच, त्रिफला, बायविडंग
पीपल, सेंधानमक, खारो नमक, राई, भुनी हींग; कचरी अज
वायन, हल्दी, भुनीहुई फिटकरी, भुना हुआ सुहागा; कुटकी,
जवाखार; कवत्रोल और सोंजर सबको कूट छानकर चूर्ण बना
कर रातिब के बाद घोडा को खिलावै और इसकी मात्रा चार
दामकी हैं महेले के साथ । जिसको बादी का रोग हो, जिसको
नालकी तकलीफ हो जो बादगीरा अथवा जोगीरा से पीडित
हो उसको बेसन में मिलाकर यह चूर्ण खिलावै । इस प्रकार
सात दिनतक खिलावै तो सब बीमारी दूर हों । यदि इसनुसखे
में सुहागा न डाला जाय तौ उत्तम है क्योंकि इससे रस जारी
हो जाता है ।
फरियाद रस चूर्ण-इस चूर्णसे बादा, कफ, गर्मी और दम ये
बन्द होजाते हैं:-जोग पावभर, हरड, बहेडा, आंवला आधसेर
सोंठ, पावभर अजमोद, पीपला मूल, जवाखार घुडवच, बाय-
विडंग, तवाखीर, काला गुगल और मग़जफ्लूस प्रत्येक पाव २
भर, सोंफ एक सेर, बेलगिरी आध पाव मरोडफली, फिटकरी