शालिहोत्रम्: अश्वशास्त्र (महर्षि शालिहोत्र - प्राचीन भारतीय अश्व-चिकित्सा एवं लक्षण विज्ञान)
Shalihotram Ashvashastra of Maharshi Shalihotra
महर्षि शालिहोत्र द्वारा
पृष्ठ 117, कुल 130 में से
संदर्भ में पढ़ें६८ शालिहोत्रम् ।
मेथी खिलाने की तरकीब-जो मेथी के साथ महेला दिया
जाय तो बहुत लाभदायकहै । तथा सोंठ चार भाग और मेथी
एक भाग पकाकर जाडेके दिनोंमें खिलावे मेथी कम खिलावे ।
हल्दी खिलाने की रीति-आधपाव हल्दी को कूटकर खालिस
दूध में आठ पहर भिगोवे फिर दूसरे दिन निकाल कर मलकर
हलुवा बनाकर खिलावे, और दूसरे दिन से हल्दी को थोडी२
बढाता जाय यहां तक कि पांचवे दिन पूरी पावभर होजाय ।
इसी प्रकार चालीस दिन तक हल्दी घोडे को खिलावे ।
अद्रख का हलुवा खिलाने की रीति ।
यह हलुवा, जवान; बुड्ढे और बछेडे सब प्रकार के घोड़ों को
मोटा करने के लिये लाभदायक है, इससे शरीर की कान्ति
बढ़ती है. इस हलुएको जाडे और चौमासे में खिलावे तो घोडा
कभी दुबला न हो ।
हल्दी, अद्रख और मेथी प्रत्येक ढाईसेर लेकर सबको महीन
पीसले फिर इनमें घी डालकर अग्नि पर चढा कर भूनले किन्तु
बहुत लाल न हो जाय फिर उसमें शक्कर पांच सेर
और गाय का दूध दस सेर मिलादे और चमचे से चलाता रहे
जब हलुआ तैयार होजाय तब उतार कर एक बर्तन में रखले
और पानी पिलाने के पश्चात् पावभर खिलावे तथा क्रमशः
बढ़ाता हुआ सेर भर की खुराक तक पहुँचावे ।
खांड खिलानेकी विधि-खांड खिलानेसे भी घोडा बहुत मोटा
होजाता है कि जितनी मोंठ हो उससे चौथाई खांड मिलाकर
घोडे को नित्य खिलावे-यह प्रयोग पाचन शक्ति को बढाता है।