शालिहोत्रम्: अश्वशास्त्र (महर्षि शालिहोत्र - प्राचीन भारतीय अश्व-चिकित्सा एवं लक्षण विज्ञान)
Shalihotram Ashvashastra of Maharshi Shalihotra
महर्षि शालिहोत्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंशालिहोत्रम् । ६७
पिलाना न रक्खे किन्तु उसी समय ठण्डा करके पानी पिलावे
जिससे दाना घास अच्छी तरह खाय और जो घोडे को बिना
ठण्डा किये पानी पिला देवे तो रुधिर जोश खा जाता है और
शरीर गरम होजाता है और कभी२ लीद और पेशाबभी बन्द
होजाताहै और आंखोंसे पानी जारी होजाता है ।
जो ऐसा हाल हो तो कस्तसीरी और तिल का तेल दोनों
को गुनगुना करके मालिश करे ।
दूसरी दवा-अरण्डकेपत्ते और गोबरकी पोटलीका सेककरे ।
तीसरीदवा-ढूंडीकेपास नश्तरदे और शहदका शर्बत पिलावे ।
रातिब हजम होनेका इलाज-अदरक आधा पाव, काली मिर्च
आधापाव, पीपलामुल, आध पाव, गिरी छटांक भर, बादाम की
मिंगी आधापाव, लोंग छटांकभर, गुजराती इलायची छः दाने
सोंठ छः टंक, तज छटांकभर और पान सात सौ सबको कूटकर
तीन भाग करे और एक२ भागको दिनमें तीन २ वार खिलावे
और दवाके बाद पहर भर क़ायजा रक्खे ।
बछेडेको मलीदा खिलानेकी रीति ।
सेरभरचनेके चूनकीरोटी बनाकर सेरभरदूधमें मललेऔर उसमें
सेरभर बूरा मिलाकर पानीपीनेकेबाद चालीसदिनतक खिलावे ।
बुड्ढे घोडेके। कल्ला खिलानेका इलाज ।
बकरीके दोचारकल्ले मंगाकर आगमेंमुलमुलाले,फिरमांसकोहड्डी
से अलगकर पानीके साथ देगचीमेंभर चूल्हेपर चढ़ादे और हाथों
से मलता रहे तथा आग मन्दी २ जलावे जब घी ऊपर आजावे
तब उसे महेले के साथ चालीस दिन तक पानी पीने के पीछे
घोडे को खिलावे ।