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शालिहोत्रम्: अश्वशास्त्र (महर्षि शालिहोत्र - प्राचीन भारतीय अश्व-चिकित्सा एवं लक्षण विज्ञान)

शालिहोत्रम्: अश्वशास्त्र (महर्षि शालिहोत्र - प्राचीन भारतीय अश्व-चिकित्सा एवं लक्षण विज्ञान)

Shalihotram Ashvashastra of Maharshi Shalihotra

महर्षि शालिहोत्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished130 पृष्ठ

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पृष्ठ 113

९४ . शालिहोत्रम् ।
खुलकर हो तो कलमी शोरा छः माशे और बबूलका गोंद ६
माशे और मिलाले ।
दूसरा नुखसा-एलुआ, हल्दी और काला निमक तीनों को
पांच तोले लेकर बारीक पीसकर दो गोलियां बांधे । एक गोली
शामको देवै और जो दस्त होने में देर हो तो दूसरी गोली
और दे देवै । जो ज्यादा दस्त हों तो तुलसीकी पत्तीकी गोली
बनाकर देवै या नींवूकी पत्तीमें चार तोले मिरच मिलाकर
खिलावै ।
तोसरा नुसखा-काला नमक एक पाव, सनाय के पत्ता आध
पाव सोंठका चूर्ण आधी छटांक इन द्रव्यों को एक सेर चावल
के गरम मांद के साथ खिलावै ।
चौथा नुसखा-अण्डीका तेल एक पाव और नमक एक पाव
इनको आध सेर अलसी के मांठमें मिलाकर पिआदे ।
जुलाबके दस्तों को बन्द करना ।
जो जुलाबसे घोडेको दस्त बहुत आयै और बन्द करने की
आवश्यकता हो तो सोंफ, सफेद जीरा, और कालीमिरच चार २
तोले लेकर कच्ची पकीकर पीसकर गोलियां बना लेवे और एक
गोली दे, फिर थोडी देर बाद दूसरी गोली दे और जो इस
दवा से दस्त बन्द न हो तो भुनी हुई हींग एक तोले; घी चार
तोले और साठी चावल आठ तोले इन सबको पीसकर गोली
बनाकर खिलावे ।
अतिसारका इलाज-जिस घोडेका पेट चलता हो उसको
यह दवा दे:-