सौन्दरनन्द महाकाव्य (महाकवि अश्वघोष - विमला संस्कृत एवं हिन्दी व्याख्या सहित सम्पूर्ण १८ सर्ग)

सौन्दरनन्द महाकाव्य (महाकवि अश्वघोष - विमला संस्कृत एवं हिन्दी व्याख्या सहित सम्पूर्ण १८ सर्ग)
Saundarananda Mahakavya of Ashvaghosha
महाकवि अश्वघोष (व्याख्याकार: आचार्य जगदीशचन्द्र मिश्र) द्वारा
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२४ सौन्दरनन्दं महाकाव्यम्
इव=यथा, तद्भ्रातृभिः=तदनुजैः, परिवृतः=वेष्टितः, राष्ट्रम्=जनपदम्, जुगोप=
रक्षितवान् ॥ ६२ ॥
हिन्दी—वे राजा आचारवान्, नीतिवान्, क्रियावान् एवं विनयी थे। उन्होंने
धर्म के लिए, न कि इन्द्रिय सुख के लिए राजछत्र धारण किया। मरुतों के साथ जैसे
इन्द्र स्वर्ग की रक्षा करते हैं, ठीक उसी तरह उस राजा ने अपने भाइयों के साथ
मिलकर अपने राज्य की रक्षा की ॥ ६२ ॥
सौन्दरनन्द-महाकाव्य में 'कपिलवस्तु-वर्णन' नामक
पहला सर्ग समाप्त हुआ।