सौन्दरनन्द महाकाव्य (महाकवि अश्वघोष - विमला संस्कृत एवं हिन्दी व्याख्या सहित सम्पूर्ण १८ सर्ग)
Saundarananda Mahakavya of Ashvaghosha
महाकवि अश्वघोष (व्याख्याकार: आचार्य जगदीशचन्द्र मिश्र) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंनामानुक्रमणी ४१३
परशुराम—क्षत्रियद्रोही भृगुपुत्र, वीरऋषि । (१।२५)
पराशर—एक प्रसिद्ध ऋषि । (७।२९)
पाण्डु—पाण्डवों के पिता, प्रसिद्ध राजा । (७।४५)
पाताल—रसातल । (११।४७)
पारिपात्र—(पर्वत) । (२।६२)
पुरुहूत—इन्द्र । (१।५९)
पुष्पकेतु—कामदेव । (७।२)
पुरु—एक पौराणिक राजा । (३।४२)
पूर्ण—बौद्ध भिक्षु । (१६।९०)
पूर्ण—भिक्षु । (१६।९०)
पूर्णक—बौद्ध भिक्षु । (१६।९०)
पूर्णशोणापरान्त—एक बौद्ध सन्यासी । (१६।९०)
प्रमद्वरा—राजा रुरु की पत्नी । (७।३७)
बल—बलदेव जी । (१०।८)
बुद्ध—तथागत । (४।२७, ४२)
बुध—ऐड़ का पिता । (७।२८)
बृहद्रथा—एक तापसी । (८।४४)
बोधिसत्त्व—भगवान् बुद्ध । (२।४८)
ब्रह्मलोक—जहाँ विधाता का निवास है । (११।५७)
ब्रह्मा—स्रष्टा । (७।३१)
भगवान्—तथागत । (४।३०, ५।८)
महालि—एक भिक्षु । (१६।८८)
भद्रजित्—एक भिक्षु । (१६।८८)
भद्रायण—एक भिक्षु । (१६।८८)
भरत—दुष्यन्त-शकुन्तला पुत्र । (१।२६)
भामिनी—नन्दपत्नी सुन्दरी । (४।३)
भार्गव—एक महर्षि । (१।२५)
भार्गव—परशुराम । (९।१७)
भीमक—एक सुदृढ़ राजा । (७।४३)
भूरिद्युम्न—एक राजर्षि । (११।४६)
भृगु—एक भिक्षु । (१६।६१)
मकन्द—एक महर्षि । (१।५८)
मघवा—इन्द्र । (७।२५)
मदन—एक ऋषि । (७।४५)
मधु—महीने का नाम । (२।५९, ७।२६)
सौ०-30