सौन्दरनन्द महाकाव्य (महाकवि अश्वघोष - विमला संस्कृत एवं हिन्दी व्याख्या सहित सम्पूर्ण १८ सर्ग)
Saundarananda Mahakavya of Ashvaghosha
महाकवि अश्वघोष (व्याख्याकार: आचार्य जगदीशचन्द्र मिश्र) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४१२ सौन्दरनन्दं महाकाव्यम्
चुन्द—एक भिक्षु । ( १६।९१ )
चैत्ररथ—तपोवन । ( २।५३, ११।५० )
जनमेजय—जनान् एजयतीति जनमेजयः = हस्तिनापुर का एक प्रसिद्ध राजा,
परीक्षित का पुत्र एवं पाण्डव अर्जुन का पोता । ( ७।४४ )
जरा—व्याध । ( ९।१८ )
जह्नु—सुहोत्र का पुत्र एक प्राचीन राजा, जिसने गंगा को अपनी पुत्री के रूप में
गोद लिया था, यही कारण है कि गंगा जाह्नवी, जह्नुसुता, जह्नुतनया के
नाम से जानी जाती है । ( ७।४० )
तथागत—भगवान् बुद्ध । ( ३।२०, ४।२४ )
तालजङ्घ—एक नाम । ( ७।३९ )
तिष्य—एक बौद्ध भिक्षु । ( १६।९० )
तिष्य—बुद्ध का एक शिष्य । ( १६।९० )
तुरङ्गराज—केशी का दूसरा नाम । ( ९।१८ )
तुषित—देव-विशेष । ( २।४८, ५५ )
दशबल—भगवान् बुद्ध का नाम । ( ४।४६ )
दशशतलोचन—देवराज इन्द्र । ( १।६१ )
दिति—कश्यपपत्नी । ( ९।१९ )
दिलीप—एक प्रतापी राजा, सुदक्षिणा के पति तथा रघु के पिता । ( ७।३२ )
दीर्घतपस—एक तपस्वी । ( १।४ )
दौष्यन्ति—राजा दुष्यन्त और शकुन्तला के पुत्र भरत । ( १।३६ )
द्रमिड़—रम्भा नामक अप्सरा के प्रेमी ( ६।४९ )
द्रव्य—एक बौद्ध भिक्षु । ( १६।८७ )
द्वैपायन—वेदव्यास । ( ७।२९-३० )
धौतकि—एक बौद्ध भिक्षु । (१६।८७)
नन्द—बुद्ध के अनुज । ( २।५७, ६३, ४।१, ४ )
नन्द—बौद्ध भिक्षु । (१६।८७)
नन्द—भिक्षु । (१६।९०)
नन्दक—भिक्षु । (१६।८९)
नन्दमाता—भिक्षुणी । (१६।८९)
नन्दन—इन्द्रकानन । (४।६, ११।१)
नमुचि—एक दैत्य । (९।१९)
नरदम्यसारथि—भगवान् बुद्ध । (१८।५१)
नहुष—एक चन्द्रवंशी राजा, ययाति का पिता, पुरूरवा का पोता और आयुस्
का पुत्र, सप्तर्षियों को एक बार इसने पालकी में जोतकर अगस्त्य के श्राप से
सर्पयोनि में गया । (११।४४)