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सर्वकोश
सौन्दरनन्द महाकाव्य (महाकवि अश्वघोष - विमला संस्कृत एवं हिन्दी व्याख्या सहित सम्पूर्ण १८ सर्ग)

सौन्दरनन्द महाकाव्य (महाकवि अश्वघोष - विमला संस्कृत एवं हिन्दी व्याख्या सहित सम्पूर्ण १८ सर्ग)

Saundarananda Mahakavya of Ashvaghosha

महाकवि अश्वघोष (व्याख्याकार: आचार्य जगदीशचन्द्र मिश्र) द्वारा

DevanagariHindipublished496 पृष्ठ

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पृष्ठ 468

४१४ सौन्दरनन्दं महाकाव्यम्
मध्यदेश—विन्ध्याचल और हिमाचल के बीच कोशी-कुरुक्षेत्र । (२।६२)
मनु—सूर्यवंश के प्रवर्त्तक स्वायम्भुव मनु । (३।४१)
मन्दर—मन्दराचल पर्वत । (१।४८)
मन्दाकिनी—स्वर्गगंगा । (११।५०)
मरुत्—पवनदेव । (१।६२, २।५४)
महाह्वय—महानाम भिक्षु । (१६।८९)
माद्री—पाण्डु की प्रिय पत्नी । (७।४५)
मानिनी—नन्द की पत्नी, सुन्दरी । (४।३)
मान्धाता—मां धास्यति इति मान्धातु= मान्धाता युवनाश्व का पुत्र, एक सूर्य-
वंशी राजा, यह अपने पिता के पेट से उत्पन्न हुआ था । ( १।४३ )
माया—शुद्धोदन की पत्नी, एक रानी । ( २।४९ )
मार—काम, यहाँ इसका अर्थ शैतान है। ( ३।७-८, १८।२८ )
मीनरिपु—शूर्पंक । ( ८।४४ )
मेधिक—एक भिक्षु । ( १६।८९ )
मेनका—शकुन्तला की माता एक अप्सरा । ( ७।३९ )
मेरु—एक पहाड़ का नाम । ( १२।२९ )
मैथिलेय—सीता देवी के पुत्र लव और कुश । ( १।२६ )
मैनाक—मेनकायाः भवः मैनाकः=हिमालय और मेनका के पुत्र, एक पहाड़ ।
( ७।४० )
मोहराज—एक बौद्ध भिक्षु । ( १६।८७ )
मौद्गल्य गोत्र—मौद्गल्यायन एक भिक्षु । ( १६।९१ )
यदृच्छा—प्रवृत्ति का कारण, या संयोग । ( १६।१७ )
यमुना—रथीतर की माता । ( ७।३३ )
ययाति—'यस्यवायोरिव यातिः, सर्वत्र रथगतिर्यस्य'=एक प्रसिद्ध चन्द्रवंशी राजा
का नाम, नहुष का पुत्र और शुक्राचार्य की बेटी देवयानी का पति ।
( १।५९, ११।४६ )
यश—एक बौद्ध संन्यासी । ( १६।८९ )
यशोद—बौद्ध भिक्षु । ( १६।८९ )
रघु—'लङ्घति ज्ञानसीमानं प्राप्नोति' लङ्घ + कु, नलोपः, लस्य रः = रघुः,
एक प्रसिद्ध राजा, दिलीप का पुत्र और अज का पिता । ( ३।४२ )
रति—कामदेव की पत्नी 'साक्षात्कामं नवमिव रतिः । ( ४।८ )
रथीतर—एक तपस्वी । ( ७।३३ )
रम्भा—नल-कुबेर की पत्नी जो इन्द्र के स्वर्ग में सर्वाधिक सुन्दरी अप्सरा मानी
जाती है । ( ६।४९, ७।३६ । )
राजगृह—बिहार का एक दर्शनीय स्थान । ( १।४२, ३।१५ )
राध—एक बौद्ध भिक्षु । ( १६।८७ )